पटना: चुनावी रणनीतिकार से सामाजिक कार्यकर्ता बने प्रशांत किशोर ने बिहार में ‘जन सुराज’ अभियान के तहत एक बड़ा संकल्प लिया है। उनका कहना है कि अगले तीन महीनों में ऐसी परिस्थितियाँ तैयार की जाएँगी, जिससे बिहार के लोगों को रोजगार के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। यह अभियान बिहार की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक, यानी पलायन को खत्म करने पर केंद्रित है।
सपने और विश्वास की नई राह
प्रशांत किशोर का मानना है कि बिहार के युवा सपने देखना छोड़ चुके हैं। ‘जन सुराज’ का मुख्य मकसद इसी मानसिकता को बदलना है। उनकी टीम ने तीन मुख्य बातों को अपनी जिद बना लिया है:
- सपने दिखाने की जिद: युवाओं में यह उम्मीद जगाना कि वे अपने सपनों को बिहार में ही पूरा कर सकते हैं।
- विश्वास जगाने की जिद: लोगों को यह भरोसा दिलाना कि पलायन का यह चक्र तोड़ा जा सकता है।
- डर भगाने की जिद: बेरोजगारी और बेहतर भविष्य की तलाश में बाहर जाने के डर को खत्म करना।

तीन महीने का ‘रोडमैप’
प्रशांत किशोर के मुताबिक, यह सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि एक ठोस योजना है। अगले तीन महीनों में जन सुराज की टीम गाँव-गाँव जाकर लोगों से जुड़ेगी और ऐसी आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देगी, जो स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा कर सकें। उनका मानना है कि बिहार में खेती, छोटे उद्योग और स्थानीय व्यापार की असीम संभावनाएँ हैं, जिन्हें सही दिशा देकर पलायन को रोका जा सकता है।
इस पहल से यह उम्मीद जग रही है कि बिहार में जल्द ही एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, जहाँ युवाओं को अपने ही राज्य में रहकर सम्मानजनक कमाई के अवसर मिलेंगे।







