नई दिल्ली।महानदी जल विवाद को लेकर ओडिशा और छत्तीसगढ़ राज्यों के बीच आखिरकार सहयोग और समाधान की दिशा में सकारात्मक संकेत मिलने लगे हैं। दोनों राज्यों ने आपसी बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की सहमति जताई है, जिसे देखते हुए महानदी जल विवाद ट्राइब्यूनल ने सुनवाई की अगली तारीख तक का अतिरिक्त समय प्रदान किया है।
मुख्यमंत्री स्तर पर संवाद, केंद्र भी सक्रिय
शनिवार को हुई सुनवाई में ट्राइब्यूनल की अध्यक्ष न्यायमूर्ति बेला एम. त्रिवेदी ने दोनों राज्यों के बीच हुई पत्राचार और सहमति पर संतोष जताया। ट्राइब्यूनल ने निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई 6 सितंबर को होगी, जिसमें दोनों राज्यों के सचिव व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर वार्ता की प्रगति से अवगत कराएंगे।
शांति और समाधान की ओर पहला कदम
ओडिशा के एडवोकेट जनरल पितांबर आचार्य ने बताया कि मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र भेजकर विवाद के शांतिपूर्ण हल का प्रस्ताव दिया था। इस पर साय ने भी सकारात्मक रुख दिखाया है और समाधान के लिए तैयार रहने की बात कही है।
दोनों राज्यों के बीच वरिष्ठ अधिकारियों की बैठकें हो चुकी हैं और माहौल आशाजनक नजर आ रहा है।
एक दशक पुराना जल विवाद अब सुलझने की उम्मीद
2016 में ओडिशा ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जिसमें आरोप लगाया गया कि छत्तीसगढ़ ने ऊपरी इलाकों में बांध बनाकर पानी का बहाव रोका, जिससे ओडिशा के निचले क्षेत्रों में खेती और पीने के पानी की किल्लत हो गई। 2018 में केंद्र सरकार ने ट्राइब्यूनल का गठन किया, लेकिन अब तक सीमित प्रगति ही हो सकी थी।
राजनीतिक समाधान को मिल रहा बल
एडवोकेट जनरल का मानना है कि भारत में अब तक कोई भी अंतर-राज्यीय जल विवाद पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया से नहीं सुलझा है, इसलिए राजनीतिक संवाद ही एकमात्र सार्थक विकल्प है। केंद्र सरकार और जल शक्ति मंत्रालय को भी इसमें सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया गया है।
महानदी जल विवाद अब राजनीतिक इच्छाशक्ति और संवाद के ज़रिए स्थायी समाधान की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। ट्राइब्यूनल का समर्थन और दोनों राज्यों की सहमति इस लंबे समय से चले आ रहे विवाद को समाप्त करने में निर्णायक हो सकती है।



