छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। 10वीं कक्षा में पढ़ने वाली एक छात्रा ने आत्महत्या कर ली। उसकी लाश घर के कमरे में फांसी के फंदे से लटकी हुई मिली। इस घटना से पूरा परिवार और मोहल्ला स्तब्ध है।
बताया जा रहा है कि छात्रा स्कूल नहीं जाना चाहती थी। जब उसने स्कूल न जाने की बात कही तो परिजनों ने नाराज होकर उसे डांटा। इसके अलावा छात्रा बिना बताए घर से बाहर चिप्स और कोल्डड्रिंक लेने चली गई थी, जिससे घरवालों ने और ज्यादा नाराजगी जताई। उन्होंने उसे फटकार भी लगाई।
इन्हीं बातों से आहत होकर छात्रा ने अपने कमरे में जाकर फांसी लगा ली। जब परिजनों को उसकी गैरमौजूदगी महसूस हुई, तो वे उसे ढूंढने लगे और फिर उसका शव कमरे में लटका मिला।
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आत्महत्या के पीछे कोई और कारण तो नहीं था।
यह घटना समाज के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा करती है—क्या बच्चों की भावनाओं को हम गंभीरता से लेते हैं? छोटी-छोटी बातों पर डांटना या गुस्सा करना कभी-कभी बच्चों के मन पर गहरी चोट पहुंचा सकता है। यह जरूरी है कि माता-पिता बच्चों से संवाद बनाकर रखें और उनकी भावनात्मक स्थिति को समझने की कोशिश करें



