छत्तीसगढ़ में शिक्षा विभाग से जुड़ा एक बड़ा घोटाला फिर से सुर्खियों में है। पाठ्य पुस्तक निगम में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले की जांच में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले ने न सिर्फ शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार को भी उजागर किया है।
घटना का सार:
वर्ष 2009-10 के दौरान छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम में पुस्तकों की छपाई और वितरण के लिए सरकारी खर्च से अनुबंध किए गए। लेकिन नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए बिना किसी वैध प्रक्रिया के ठेकेदारों को करीब 4.3 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया।
EOW की जांच और चार्जशीट:
EOW ने इस मामले की विस्तृत जांच कर लगभग 2000 पन्नों की चार्जशीट रायपुर की विशेष अदालत में पेश की। चार अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है, जिन्होंने अपने पद का दुरुपयोग कर सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचाया।
मुख्य आरोपी:
चार सरकारी अफसर जो इस घोटाले में संलिप्त पाए गए, उनके नाम इस प्रकार हैं –
1. सुशांत मिश्रा
2. संजय पिल्ले
3. नरेन्द्र गुप्ता
4. दुर्गेश अग्रवाल
इन पर आपराधिक षड्यंत्र, वित्तीय अनियमितता और पद के दुरुपयोग का आरोप है।
घोटाले का प्रभाव:
यह घोटाला सिर्फ सरकारी खजाने को नुकसान नहीं, बल्कि शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र को भी नुकसान पहुंचाता है। बच्चों के लिए निर्धारित पाठ्य सामग्री और उनके वितरण में इस तरह की लापरवाही भविष्य को अंधकारमय बना सकती है।



