छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और पाटन विधानसभा सीट से विधायक भूपेश बघेल की विधानसभा सदस्यता पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। विधानसभा चुनाव 2023 में भारी विरोध के बावजूद जीत दर्ज करने वाले बघेल अब कानूनी शिकंजे में फंसते नजर आ रहे हैं। चुनाव आचार संहिता उल्लंघन के मामले में भूपेश बघेल को सुप्रीम कोर्ट से कोई अंतरिम राहत नहीं मिली है।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मई 2024 में भूपेश बघेल के चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई जारी रखने का आदेश दिया था, जिसे पूर्व मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर रोक लगाने से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट दोनों पक्षों को सुनने के बाद ही याचिका की स्वीकार्यता (मेंटेनेबिलिटी) पर निर्णय ले। इसी के बाद बघेल ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी याचिका वापस ले ली।
यह याचिका दुर्ग से भाजपा सांसद विजय बघेल ने दायर की थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि भूपेश बघेल ने पाटन सीट पर चुनाव प्रचार की समय सीमा समाप्त होने के बाद भी प्रचार जारी रखा, जो आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है। इस संबंध में वायरल वीडियो को सबूत के तौर पर पेश किया गया है।
वहीं दूसरी ओर, प्रदेश के चर्चित शराब घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे चैतन्य बघेल पहले से ही रायपुर सेंट्रल जेल में न्यायिक हिरासत में हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और अन्य केंद्रीय एजेंसियों की जांच में चैतन्य की घोटाले में 1000 करोड़ रुपये से अधिक की हिस्सेदारी उजागर हुई है। सूत्रों के अनुसार, चैतन्य और अन्य आरोपियों के बयान के बाद अब एजेंसियों की नजर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर है।
बताया जा रहा है कि बघेल परिवार की संपत्तियों, बेटी-दामाद सहित रिश्तेदारों की पिछले पांच वर्षों में हुई कमाई की भी जांच जारी है। इस बात के भी संकेत हैं कि शराब घोटाले से अर्जित बड़ी मात्रा में नकदी भूपेश बघेल के माध्यम से चैतन्य के हाथों में सौंपी जाती थी, जबकि चैतन्य न तो कोई सरकारी पदाधिकारी हैं और न ही शराब कारोबार से जुड़े हैं।
ऐसे में पाटन सीट पर भूपेश बघेल की विधायकी रद्द होने की संभावना तेज हो गई है और जेल की आहट अब उनके भी करीब आती दिख रही है।







