भारत में मुस्लिम वोट का गैर भाजपाईकरण करने के लिए हर राज्य में कोई न कोई विशेष पार्टी निर्धारित है. बिहार में मुस्लिम वोट की ठेकेदारी राजद के हिस्से है. इसलिए तेजस्वी यादव को कभी मुसलमानों के वोटों की चिंता नहीं रही. तभी तो तेजस्वी अब कभी चौरसिया तो कभी कुशवाहा सम्मान रैली के मंचों पर बाकी बिखरा वोटबैंक साधने में लगे हुए हैं.
अब इस वीडियो में प्रशांत किशोर जो कह रहे हैं वो बात अगर बिहार की 5 प्रतिशत मुस्लिम आबादी भी आत्मसात कर ले तो बिहार चुनाव का खेल बिगड़ जाएगा. 90 से पहले बिहार में मुस्लिम वोट कांग्रेस का था, 90 के बाद लालू का हो गया. नीतीश आए तो उनकी छवि और महिलाओं पर आधारित राजनीति ने उनको छिटपुट मुस्लिम वोट दिया लेकिन वो संख्या कभी निर्णायक नहीं रही. प्रशांत किशोर राजद से मुस्लिम वोटबैंक का चेकबुक छीनना चाहते हैं.
लेकिन प्रशांत जिस एजेंडा पर मुस्लिम वोट को अपने हिस्से करना चाहते हैं वो सिर्फ “गैर भाजपाईकरण” वाला मोहरा नहीं है. वो बिहार के मुसलमानों को “जमात” से ऊपर उठकर “विकास की बात” पर वोट देने को कह रहे हैं, जो फिलहाल होना दूर से तो मुश्किल ही दिखता है.
लेकिन ये सच है कि अब भारत में मुसलमानों को अल्पसंख्यक का आंसू रोना बंद करना चाहिए. क्योंकि अल्पसंख्यक हमेशा हाशिए पर ही रहता है. उसके हिस्से सिर्फ सियासत आती है. स्कूल, शिक्षा और स्वास्थ्य नहीं.
उत्तर पूर्वी बिहार में मुसलमानों को अपनी गुरबत कभी क्यों नहीं दिखती, ये आश्चर्य की बात है?



