गुवाहाटी, 16 जुलाई – असम में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की बंद कमरे में हुई बैठक से लीक हुई जानकारी ने पार्टी के अंदर मौजूद गहरे संकट को उजागर कर दिया है। इस बैठक में राहुल गांधी ने असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा शर्मा को सत्ता में आने पर जेल भेजने की बात कही थी। यह बयान गोपनीय था, लेकिन कुछ ही देर बाद ही हेमंत बिस्वा शर्मा ने यह जानकारी ट्वीट कर दी।इससे दो बातें साफ़ हैं कि, मुख्यमंत्री के पास अभी भी कांग्रेस के भीतर वफादार लोग हैं
इस घटनाक्रम ने कांग्रेस की अंदरूनी विश्वसनीयता और संगठनात्मक एकजुटता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सिर्फ एक ‘लीक’ नहीं, बल्कि कांग्रेस की कमजोर पड़ती भीतरी दीवारों का संकेत है।
राहुल गांधी ने पहले भी सार्वजनिक रूप से कहा है कि “कांग्रेस में आधे लोग भाजपा के लिए काम कर रहे हैं।” लेकिन अब यह स्थिति और भी गंभीर लगती है, क्योंकि बंद कमरे की रणनीतिक बैठकों में शामिल लोग भी अगर भाजपा को अंदरूनी जानकारियां पहुंचा रहे हैं, तो यह पार्टी के लिए एक गंभीर खतरे का संकेत है।
क्या कांग्रेस की रणनीति सुरक्षित है?
जिस बैठक को गोपनीय रखा गया था, उसमें क्या चर्चा हुई, इसकी जानकारी मुख्यमंत्री के पास मिनटों में कैसे पहुंची — यह सवाल न केवल कांग्रेस कार्यकर्ताओं को बेचैन कर रहा है, बल्कि शीर्ष नेतृत्व को भी आत्ममंथन के लिए मजबूर कर रहा है।
भीतरघात की राजनीति का पर्दाफाश जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कांग्रेस को आगामी चुनावों में अपनी स्थिति मजबूत करनी है, तो सबसे पहले उसे अपने भीतर मौजूद ऐसे ‘घुसपैठियों’ की पहचान करनी होगी, जो संगठन की छवि और रणनीति को लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं। यदि पार्टी अपने ही सदस्यों की वफादारी को नहीं पहचान पा रही है, तो जैसा कि टिप्पणीकारों ने कहा — “फिर कांग्रेस का भगवान ही मालिक है।”
इस पूरे प्रकरण ने साफ कर दिया है कि असम की राजनीति केवल जनता के समर्थन से नहीं, बल्कि अंदरूनी चालबाज़ियों और रणनीतिक सूझबूझ से जीती जाएगी। राहुल गांधी का आक्रामक रुख जहां एक ओर सत्ता पक्ष को चुनौती देता है, वहीं दूसरी ओर उनकी पार्टी को भी आत्मनिरीक्षण की सख्त ज़रूरत है।



