“जहां एंबुलेंस भी न पहुंची, वहां ‘विकास’ कैसे पहुंचा?”,दलदल में चलकर संघर्ष कर रही गर्भवती महिला

Madhya Bharat Desk
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सार

गर्भवती महिला को कई किलोमीटर,दलदल वाली सड़क पर चलना पड़ा, तब जा कर कहीं एंबुलेंस मिली. मामला पखांजूर के पंडरीपानी का है. स्वास्थ्य सुविधाएं पहले से ही बदहाल हैं,ऊपर से ख़राब सड़कों ने सरकारी दावे की पोल खोल दी है.कई सालों से सड़कें उन्हीं इलाकों में बन रही हैं, जहां खनन होने हैं।

विस्तार

सरकार की स्वास्थ्य और सड़क सुविधा के दावों की हकीकत एक बार फिर उजागर हो गई है। कांकेर ज़िले के पखांजूर ब्लॉक के पंडरीपानी गांव से एक शर्मसार कर देने वाली तस्वीर सामने आई है, जहां एक गर्भवती महिला को समय पर इलाज के लिए कई किलोमीटर तक दलदल भरी कच्ची सड़क पर चलकर एंबुलेंस तक पहुंचना पड़ा।

ग्रामीणों के मुताबिक, गांव तक पक्की सड़क नहीं होने के कारण बारिश में रास्ता कीचड़ और दलदल में तब्दील हो जाता है। हालात इतने खराब हैं कि एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी और गर्भवती महिला को स्ट्रेचर की बजाय पैदल चलकर एंबुलेंस तक जाना पड़ा। महिला को पीठ पर या सहारे से लाना पड़ा, जिससे उसकी और बच्चे की जान को गंभीर खतरा हो सकता था।

विकास के दावे हुए फेल:

गांववालों का आरोप है कि पिछले कई वर्षों से पंडरीपानी और आसपास के इलाकों की अनदेखी की जा रही है। जहां खनन कार्य होते हैं, वहीं सड़कें बनती हैं। बाकी गांव विकास की बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।

स्थानीय लोगों में रोष:

गांववासियों का कहना है कि वे कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से पक्की सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग कर चुके हैं, लेकिन आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

प्रशासन मौन:

इस मामले में अभी तक स्थानीय प्रशासन की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

यह घटना न सिर्फ सरकारी दावों पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास अब भी सिर्फ कागज़ों तक सीमित है। जब तक बुनियादी सुविधाओं की बराबरी नहीं होगी, तब तक “सबका साथ, सबका विकास” केवल एक नारा ही रहेगा।

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