मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के बुधनी विधानसभा क्षेत्र के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के घर तोड़े जाने और खेतों में खड़ी फसलें नष्ट करने का मामला गरमा गया है। रविवार दोपहर वन विकास निगम ने अतिक्रमण हटाने के नाम पर बारेला समुदाय के 12 परिवारों के घर बुलडोजर से तोड़ दिए। आरोप है कि इस कार्रवाई के दौरान मक्का और तुअर की फसलें भी ट्रैक्टर से रौंद दी गईं।
प्रभावित परिवारों का कहना है कि उनके पीने और खेती के काम में इस्तेमाल होने वाले कुएं को भी मिट्टी से भर दिया गया। घर खो चुके परिवार अब खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। कई परिवारों की आजीविका का मुख्य सहारा खेती है, ऐसे में फसल नष्ट होने से उनके सामने भोजन और रोजगार दोनों का संकट खड़ा हो गया है।
इस मामले में केंद्रीय कृषि मंत्री और विदिशा सांसद शिवराज सिंह चौहान प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचे। घरों के मलबे और तबाह फसलों को देखकर वे काफी भावुक और गुस्से में दिखे। उन्होंने कार्रवाई को ‘अन्याय की अति’ और ‘जुर्म की पराकाष्ठा’ बताया। उन्होंने कहा कि गरीब और आदिवासी परिवारों के साथ इस तरह का व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
शिवराज सिंह चौहान ने आरोप लगाया कि उनके पहले दिए गए निर्देश के बावजूद वन विभाग और प्रशासन ने कार्रवाई रोकी नहीं। उन्होंने मुख्य सचिव से फोन पर बात करते हुए कड़ी नाराजगी जताई और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।
केंद्रीय मंत्री ने प्रभावित परिवारों को आश्वासन दिया कि जिनके घर तोड़े गए हैं, उनके लिए नए घर बनाए जाएंगे। स्थायी व्यवस्था होने तक पीड़ित परिवारों के ठहरने और भोजन की अस्थायी व्यवस्था की जाएगी।





