छत्तीसगढ़ में अडानी के आने से पहले न ही यहां रोजगार थी और न ही शिक्षा के लिए एक अच्छा स्कूल था। प्रदेश में बच्चों को अंग्रेजी का ABCD तक पढ़ना नहीं आता था। अडानी फाउंडेशन के पहल के बाद ही यहां के बच्चों की शिक्षा में सुधार हुआ है। यह पूरी तरह से छत्तीसगढ़ में सरकार की नाकामी को उजागर करता है।
दरअसल, अडानी समूह द्वारा प्रचार के लिए एक वीडियो जारी किया गया जिसमें दावा किया गया कि उसके आने के बाद से ही शिक्षा बेहतर हुआ है। यानी छत्तीसगढ़ में सरकार पूरी तरह फेल है। यदि किसी निजी कंपनी को यह बताना पड़ रहा है कि उसके आने से पहले बच्चों को बुनियादी शिक्षा तक उपलब्ध नहीं थी, तो यह सरकार की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
सरकार पर सवाल
शिक्षा, स्कूलों की गुणवत्ता, शिक्षकों की उपलब्धता और ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों को बुनियादी सुविधाएं देना सरकार की जिम्मेदारी है। ऐसे में किसी कॉरपोरेट समूह के प्रचार वीडियो में सरकारी व्यवस्था से पहले की स्थिति को बेहद खराब बताना राजनीतिक रूप से सरकार के लिए असहज पैदा करने वाली स्थिति है।
अडानी फाउंडेशन का दावा
अडानी फाउंडेशन का दावा है कि उसके आने से ही यह सब संभव हो पाया है। अडानी समूह की ओर से शिक्षा, स्कूलों के उन्नयन, डिजिटल सुविधाओं और विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने जैसी पहलों का उल्लेख किया जाता रहा है। अडानी से जुड़े अन्य शिक्षा कार्यक्रमों में कंप्यूटर लैब और आधुनिक शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे भी सामने आए हैं।






