नई दिल्ली।देश में गेहूं की बेहतर उपलब्धता और बढ़ते उत्पादन के बीच केंद्र सरकार ने गेहूं के निर्यात पर लगी रोक हटा दी है। अब भारत से गेहूं और ड्यूरम गेहूं का निर्यात किया जा सकेगा। इसके साथ ही गेहूं के आटे, मैदा और सूजी के एक्सपोर्ट को भी मंजूरी दे दी गई है।
सरकार के इस फैसले से किसानों, व्यापारियों और गेहूं से जुड़े उद्योगों को विदेशी बाजार में नए मौके मिलने की उम्मीद है। ड्यूरम गेहूं का इस्तेमाल खास तौर पर पास्ता और सूजी जैसे उत्पाद बनाने में किया जाता है।
गेहूं उत्पादन में हुआ इजाफा
सरकार के इस फैसले की एक बड़ी वजह देश में गेहूं की बेहतर उपलब्धता और उत्पादन में बढ़ोतरी मानी जा रही है। मई में जारी आंकड़ों के मुताबिक, 2025-26 में भारत का कुल खाद्यान्न उत्पादन 37.6563 करोड़ टन रहने का अनुमान है। यह 2024-25 के 35.7732 करोड़ टन से करीब 5.3 फीसदी ज्यादा है।
वहीं, 2025-26 में गेहूं का उत्पादन 12.0657 करोड़ टन रहने का अनुमान है। पिछले साल गेहूं का उत्पादन 11.7945 करोड़ टन था। यानी इस बार करीब 27.12 लाख टन की बढ़ोतरी होने का अनुमान है।
फरवरी में मिली थी सीमित छूट
इससे पहले फरवरी में सरकार ने देश में गेहूं का स्टॉक बेहतर होने के बाद 25 लाख मीट्रिक टन गेहूं और 5 लाख मीट्रिक टन गेहूं उत्पादों के सीमित निर्यात की अनुमति दी थी। अब सरकार ने गेहूं की निर्यात नीति को ‘प्रतिबंधित’ से बदलकर ‘मुक्त’ कर दिया है।
आटा, मैदा और सूजी का भी होगा एक्सपोर्ट
विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) के मुताबिक, गेहूं के साथ अब आटा, मैदा और सूजी का निर्यात भी किया जा सकेगा। इससे भारतीय गेहूं और उससे बने उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचने के रास्ते खुलेंगे।
गौरतलब है कि सरकार ने मई 2022 में गेहूं के निर्यात पर रोक लगाई थी। इसके बाद अगस्त 2022 में आटा और गेहूं से बने दूसरे उत्पादों के निर्यात पर भी पाबंदी लगा दी गई थी। इस साल फरवरी में सरकार ने सीमित मात्रा में निर्यात की अनुमति देकर धीरे-धीरे इन प्रतिबंधों में ढील दी थी।
अब गेहूं का निर्यात पूरी तरह खोलने से किसानों और कारोबारियों को विदेशी बाजार में अपनी उपज और उत्पाद बेचने के नए अवसर मिल सकते हैं।





