नई दिल्ली:भारत की वर्षों पुरानी कूटनीतिक मुहिम को एक बड़ी सफलता मिली है। आतंकवाद वित्तपोषण और मनी लॉन्ड्रिंग पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था FATF (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स) ने पहली बार राज्य प्रायोजित आतंकवाद को वैश्विक खतरा माना है। जुलाई 2025 की अपनी नई रिपोर्ट में FATF ने यह स्वीकार किया है कि कुछ देश आतंकवाद को राष्ट्रीय रणनीति की तरह उपयोग करते हैं।
पाकिस्तान पर बढ़ेगा अंतरराष्ट्रीय दबाव
भारत, लंबे समय से पाकिस्तान पर आतंकवाद को समर्थन देने का आरोप लगाता रहा है। FATF की नई रिपोर्ट में आतंकवादी संगठनों लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद की फंडिंग गतिविधियों का स्पष्ट उल्लेख है, जो पाकिस्तान से संचालित होते हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में आतंकी हमलों के लिए इन संगठनों ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से विस्फोटक सामग्री खरीदी।
FATF ने पुलवामा हमले और यूपी मंदिर हमले का किया जिक्र
FATF की रिपोर्ट में 2019 के पुलवामा हमले और 2022 में गोरखनाथ मंदिर हमले का उल्लेख करते हुए यह बताया गया कि आतंकियों को वित्तीय सहायता डिजिटल माध्यमों से प्रदान की गई। गोरखनाथ हमले में PayPal के जरिए ऑनलाइन भुगतान किया गया था।
डिजिटल माध्यमों के दुरुपयोग पर चिंता
रिपोर्ट में यह चेतावनी दी गई है कि कई देशों में अब भी आतंकवाद की फंडिंग रोकने की पर्याप्त क्षमता नहीं है। डिजिटल ट्रांजैक्शन, ई-वॉलेट्स और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अब आतंकी संगठनों के लिए नए माध्यम बनते जा रहे हैं। FATF ने सरकारों और प्रौद्योगिकी कंपनियों से साइबर निगरानी बढ़ाने और डिजिटल फाइनेंशियल प्लेटफॉर्म्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।







