प्रतीक पाण्डेय का केंद्रीय मंत्री को पत्र, प्रमुख सचिव सुबोध सिंह के पूरे कार्यकाल की दो स्तरों पर जांच की मांग

Madhya Bharat Desk
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रायपुर। अखिल भारतीय जनसंघ के प्रदेश महामंत्री प्रतीक पाण्डेय ने केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह से छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री सचिवालय में पदस्थ प्रमुख सचिव सुबोध सिंह पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए उनके सम्पूर्ण कार्यकाल की दो स्तरों पर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने संभावित आपराधिक षड्यंत्र की आशंका जताते हुए कहा है कि पहली जांच उनके कार्यकाल के दौरान प्रशासनिक स्तर पर हुए कथित विवादित कार्यों की तथा दूसरी भारतीय जनता पार्टी के संगठन को प्रदेश में कथित रूप से बदनाम करने के आरोपों की कराई जाए।

प्रतीक पाण्डेय का आरोप है कि प्रदेश में सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने और सुधार संबंधी सुझाव देने वाले लोगों को सोशल मीडिया के माध्यम से कथित रूप से अपमानजनक और अभद्र टिप्पणियों का निशाना बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि उन्होंने भी शासन को विभिन्न विषयों पर सुझाव दिए थे, जिन पर अमल होने से भाजपा सरकार की छवि और बेहतर होती। इसके बाद अचानक सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ फर्जी प्रोफाइलों तथा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की तस्वीर लगी कुछ प्रोफाइलों से आपत्तिजनक टिप्पणियां आने लगीं।

उन्होंने दावा किया कि इन्हीं प्रोफाइलों से प्रदेश के अन्य लोगों को भी निशाना बनाया गया, जिससे आम लोगों के बीच यह धारणा बनी कि ऐसी गतिविधियां भाजपा की सोशल मीडिया टीम द्वारा संचालित की जा रही हैं। संदेह होने पर उन्होंने 5 जुलाई 2026 को स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई।

पाण्डेय ने आरोप लगाया कि मामले की जानकारी जुटाने पर उन्हें पता चला कि मुख्यमंत्री सचिवालय में पदस्थ रहते हुए सुबोध सिंह ने कथित रूप से अपनी एक सोशल मीडिया टीम बना रखी है, जो उनके निर्देश पर इस प्रकार की टिप्पणियां करती है। उनका कहना है कि यदि जांच में यह तथ्य सही पाए जाते हैं तो यह एक प्रशासनिक अधिकारी द्वारा किया गया गंभीर आपराधिक कृत्य होगा। उनके अनुसार, सुबोध सिंह भाजपा की आड़ लेकर अपने कथित कृत्यों को छिपाने का प्रयास कर रहे हैं।

प्रतीक पाण्डेय ने मुख्यमंत्री सचिवालय में पदस्थ सचिव पी. दयानंद पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि वे भाजपा नेताओं और विचार परिवार से जुड़े लोगों को भाजपा अथवा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े होने या नहीं होने का “प्रमाण-पत्र” देने जैसी भूमिका में दिखाई देते हैं।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सुबोध सिंह वर्ष 2024 की नीट परीक्षा से जुड़े मामले में सीबीआई जांच की प्रक्रिया के अधीन रहे हैं। उनका कहना है कि इस प्रकार के आरोप न तो प्रशासन और न ही भाजपा सरकार की छवि के लिए उचित हैं।

उन्होंने कहा कि वे अखिल भारतीय जनसंघ के पदाधिकारी हैं, लेकिन उनके लिए विचारधारा सर्वोपरि है। ऐसे अधिकारियों के कारण प्रदेश में कांग्रेस के सत्ता में आने जैसी परिस्थितियां उत्पन्न नहीं होनी चाहिए। उन्होंने प्रदेश में नौकरशाही पर नियंत्रण की आवश्यकता बताते हुए प्रशासनिक अधिकारियों को केवल प्रशासनिक दायित्वों तक सीमित रखने की वकालत की।

अंत में उन्होंने केंद्रीय मंत्री से मांग की कि सुबोध सिंह को तत्काल प्रभाव से मुख्यमंत्री सचिवालय से अन्यत्र पदस्थ किया जाए तथा उनके पूरे कार्यकाल की निष्पक्ष जांच शीघ्र प्रारंभ कराई जाए।

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