जिले के आदिवासी विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बोरगांव में जिला खनिज न्यास (DMF) मद से स्वीकृत निर्माण कार्यों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और अनियमितता के आरोप सामने आए हैं। वर्ष 2025 में हाई स्कूल बोरगांव में विद्यार्थियों के लिए साइकिल स्टैंड शेड और कांक्रीटीकरण कार्य हेतु 13 लाख 86 हजार रुपये स्वीकृत किए गए थे। निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायत बोरगांव को बनाया गया था, लेकिन आरोप है कि पंचायत की भूमिका को दरकिनार कर डौंडी के ठेकेदार विशाल जैन ने स्वयं काम शुरू कर दिया।
आरोप है कि निर्माण कार्य आज भी लगभग 50 प्रतिशत अधूरा है, जबकि दस्तावेजों में इसे पूर्ण दर्शाकर भुगतान की प्रक्रिया पूरी कर ली गई। मौके पर लगे सूचना बोर्ड में 12 जून 2026 को कार्य पूर्ण होने की तिथि भी दर्ज है, जबकि जमीनी स्थिति इससे बिल्कुल अलग बताई जा रही है।
पुरानी बाउंड्री वॉल पर 4 ईंटें जोड़कर बना दिया शेड
स्थानीय लोगों के अनुसार ठेकेदार ने स्कूल की पुरानी बाउंड्री वॉल पर महज चार ईंटें जोड़कर उसी पर पिलर खड़े कर दिए और साइकिल स्टैंड शेड तैयार कर दिया। सामने की ओर लगाए गए 14 कॉलम भी बेहद घटिया गुणवत्ता के बताए जा रहे हैं। परिसर में केवल कुछ हिस्से में सीसी रोड बनाकर पूरे कार्य को कागजों में पूर्ण दिखा दिया गया।

सरपंच बोलीं— विरोध किया, लेकिन किसी ने नहीं सुनी
ग्राम पंचायत बोरगांव की सरपंच देवकी बाई कोठपरिया ने आरोप लगाया कि ठेकेदार विशाल जैन ने उनसे कहा था कि वह पंचायत में तीन कार्य लेकर आया है। सरपंच के अनुसार उन्होंने कई बार पुरानी दीवार पर साइकिल स्टैंड बनाने का विरोध किया, लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई।
सरपंच का कहना है कि जैसे ही पंचायत के खाते में राशि आई, ठेकेदार ने चेक कटवाकर पैसे निकाल लिए। अब काम अधूरा और गुणवत्ताहीन है। उन्होंने आशंका जताई कि भविष्य में यदि जांच हुई तो कार्रवाई पंचायत और सरपंच पर होगी, जबकि काम करने वाला ठेकेदार जिम्मेदारी से बच जाएगा।
पूरे आदिवासी विकासखंड में ठेकेदारों के दबदबे का आरोप
यह मामला केवल बोरगांव तक सीमित नहीं बताया जा रहा। आरोप है कि पूरे आदिवासी विकासखंड में DMF के कार्यों पर ठेकेदारों का कब्जा है। कई सरपंचों का कहना है कि “काम हमने स्वीकृत कराया है” कहकर ठेकेदार पंचायतों से निर्माण कार्य अपने हाथ में ले लेते हैं और बाद में अधूरे एवं घटिया निर्माण कर पंचायत प्रतिनिधियों को जवाबदेही के संकट में छोड़ देते हैं।

कुछ समय पहले भी कई पंचायतों में वॉटर रिमूवल प्लांट लगाने के नाम पर केवल 4×6 फीट का बॉक्स रखकर लाखों रुपये की राशि निकालने के आरोप लगे थे। आरोप है कि कार्रवाई करने के बजाय संबंधित अधिकारियों ने सरपंचों को नोटिस जारी कर दिया, जबकि ठेकेदारों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
अब बोरगांव का मामला सामने आने के बाद DMF कार्यों की गुणवत्ता, भुगतान प्रक्रिया और अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।





