प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत किए गए आवासों को लेकर बाराद्वार नगर पंचायत में बड़ा विवाद सामने आया है। शासकीय भूमि के रिकॉर्ड में कथित हेराफेरी कर आवास स्वीकृत कराने के आरोपों ने स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच के लिए टीम गठित कर दी गई है, जो दस्तावेजों और भूमि अभिलेखों की जांच में जुट गई है।
जानकारी के मुताबिक नगर पंचायत बाराद्वार में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 288 आवासों की स्वीकृति के लिए दस्तावेज तैयार किए गए थे। आरोप है कि इनमें से करीब 246 आवास आबादी और घास मद की भूमि पर प्रस्तावित किए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि घास मद की भूमि पर आवास निर्माण नियमों के अनुरूप नहीं है, बावजूद इसके रिकॉर्ड में बदलाव कर भूमि को आबादी भूमि दर्शाया गया और स्वीकृति के लिए प्रस्ताव भेज दिया गया।
मामले के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर कई सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते शिकायत नहीं होती तो कथित रूप से गलत दस्तावेजों के आधार पर बड़ी संख्या में आवास स्वीकृत हो सकते थे। वहीं शिकायतकर्ताओं ने शासकीय भूमि के उपयोग और राजस्व रिकॉर्ड में हुई कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
जांच टीम अब संबंधित दस्तावेजों, भूमि रिकॉर्ड और अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल बाराद्वार नगर पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर सियासी और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।





