डिग्रियों पर ‘भारत’ की मुहर, 17 विश्वविद्यालयों ने पकड़ी नई राह

Madhya Bharat Desk
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जबलपुर स्थित रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह इस बार सिर्फ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मौजूदगी की वजह से ही नहीं, बल्कि एक बड़े सांस्कृतिक और प्रतीकात्मक बदलाव के कारण भी चर्चा में है। विश्वविद्यालय ने पहली बार अपनी डिग्रियों, अंकसूचियों, स्वर्ण पदकों और अन्य आधिकारिक प्रमाण-पत्रों पर ‘India’ की जगह ‘भारत’ शब्द अंकित करने का फैसला किया है।

कुलगुरु प्रो. राजेश कुमार वर्मा के अनुसार विश्वविद्यालय ने जनवरी 2025 से ही अपने आधिकारिक पत्राचार और दस्तावेजों में ‘भारत’ शब्द का प्रयोग शुरू कर दिया था। अब यह बदलाव छात्रों को मिलने वाली उपाधियों और प्रमाण-पत्रों तक पहुंच गया है।

भारत बनाम इंडिया: आखिर विवाद क्या है?

देश का संविधान स्वयं इस प्रश्न का उत्तर देता है। संविधान के अनुच्छेद-1 में स्पष्ट लिखा है:

“India, that is Bharat, shall be a Union of States.”

अर्थात — इंडिया अर्थात भारतराज्यों का एक संघ होगा।

यानी संविधान दोनों नामों को वैध मान्यता देता है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सरकारी और शैक्षणिक संस्थानों में ‘भारत’ शब्द के उपयोग को बढ़ावा देने की मांग तेज हुई है। समर्थकों का तर्क है कि ‘भारत’ देश की सभ्यता, संस्कृति और ऐतिहासिक पहचान से जुड़ा नाम है, जबकि ‘India’ विदेशी प्रभाव से प्रचलित हुआ।

‘India’ शब्द आया कहां से?

इतिहासकारों के अनुसार ‘India’ शब्द की जड़ें सिंधु (Indus) नदी से जुड़ी हैं। फारसी भाषा में ‘सिंधु’ का उच्चारण ‘हिंदू’ हुआ और यूनानी यात्रियों ने इसे ‘इंडोस’ या ‘इंडिया’ कहना शुरू किया। धीरे-धीरे पश्चिमी दुनिया में पूरे भारतीय उपमहाद्वीप को ‘India’ के नाम से पहचाना जाने लगा।

वहीं ‘भारत’ शब्द का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों, महाभारत, पुराणों और विष्णु पुराण जैसे साहित्य में मिलता है। माना जाता है कि यह नाम राजा भरत से जुड़ा है, जिनके नाम पर इस भूभाग को ‘भारतवर्ष’ कहा गया।

G-20 से मिली नई बहस

वर्ष 2023 में भारत की अध्यक्षता में आयोजित G20 Summit के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की ओर से जारी आधिकारिक निमंत्रण पत्र में “President of Bharat” शब्द का उपयोग किया गया था। इसके बाद ‘भारत’ बनाम ‘India’ की बहस राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी।

कई विश्वविद्यालय बदल रहे पहचान

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के अलावा देवी अहिल्या विश्वविद्यालय , गुरु घासीदास विश्वविद्यालय , पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय और अन्य विश्वविद्यालय भी अपने दस्तावेजों में ‘भारत’ शब्द अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। बताया जा रहा है कि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात, हरियाणा और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों के करीब 17 विश्वविद्यालय इस पहल से जुड़ चुके हैं।

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