छत्तीसगढ़ में जाति प्रमाण पत्र की कट-ऑफ डेट बदलने की मांग तेज, राज्यपाल को सौंपा गया ज्ञापन

Madhya Bharat Desk
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रायपुर। छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जाति वर्ग के जाति प्रमाण पत्र जारी करने के लिए निर्धारित कट-ऑफ डेट में संशोधन की मांग को लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों ने आवाज बुलंद की है। संयुक्त अनुसूचित जाति समाज के प्रतिनिधिमंडल ने सामाजिक कार्यकर्ता उपेन्द्र जगत के नेतृत्व में माननीय राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर उत्तराखंड की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी जाति प्रमाण पत्र जारी करने हेतु 1 नवंबर 2000 को कट-ऑफ डेट लागू करने की मांग की है।

ज्ञापन में बताया गया कि उत्तराखंड राज्य में जाति प्रमाण पत्र जारी करने के लिए अगस्त 1950 की बजाय राज्य गठन की अधिसूचना तिथि को आधार माना गया है। राज्य सरकार ने वहां 1 नवंबर 2000 को कट-ऑफ डेट के रूप में लागू किया है। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के निर्देशों के अनुरूप छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग (सामाजिक प्रास्थिति प्रमाणीकरण का विनियम) नियम, 2013 में आवश्यक संशोधन कर राज्य में भी यही व्यवस्था लागू की जाए।

इस मांग को लेकर 10 जून 2026 को रायपुर के घड़ी चौक स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर प्रतिमा के समक्ष एक दिवसीय मौन धरना एवं ध्यानाकर्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। धरने में संयुक्त अनुसूचित जाति समाज सहित भारतीय बौद्ध महासमाज, घासी-घसिया समाज, गाड़ा महासमाज, महार समाज, डोमार समाज, मखियार समाज, रविदास समाज, मांग-मातंग समाज तथा अरुंधति मोची विकास पंचायत समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज के प्रबुद्धजन, महिलाएं एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। वक्ताओं ने कहा कि कट-ऑफ डेट में संशोधन से हजारों पात्र परिवारों को राहत मिलेगी और सामाजिक न्याय की भावना को मजबूती मिलेगी। समाज के प्रतिनिधियों ने सरकार से इस विषय पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की है।

उपेन्द्र जगत, सामाजिक कार्यकर्ता, ने कहा कि यह मांग लंबे समय से लंबित है और समाज के हित में सरकार को जल्द निर्णय लेना चाहिए, ताकि पात्र लोगों को जाति प्रमाण पत्र प्राप्त करने में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

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