भानुप्रतापपुर।गोदावरी माइंस (कच्चे) में हाल ही में डस्ट मटेरियल धंसने की घटना के बाद खनन कार्यों को लेकर कई सवाल खड़े होने लगे हैं। स्थानीय लोगों और सूत्रों के मुताबिक, धंसे हुए डस्ट मटेरियल को आवश्यक प्रक्रिया पूरी किए बिना माइंस क्षेत्र से बाहर निकालकर आसपास के इलाकों में डंप किया जा रहा है। यदि ऐसा हो रहा है तो यह खनन और पर्यावरण संबंधी नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
ग्रामीणों का कहना है कि माइंस से निकाला गया डस्ट मटेरियल आसपास के गांवों की ओर ले जाया जा रहा है। लोगों के बीच चर्चा है कि यदि इस सामग्री का परिवहन बिना रॉयल्टी जमा किए, बिना ट्रांजिट पास और संबंधित विभागों की अनुमति के किया जा रहा है, तो यह नियमों के विपरीत माना जा सकता है। हालांकि पूरे मामले की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आ सकेगी।
पर्यावरण और लोगों की सेहत पर असर की आशंका
जानकारों का मानना है कि खनन क्षेत्र से निकलने वाले डस्ट मटेरियल को खुले स्थानों पर डंप करने से पर्यावरण को नुकसान पहुंच सकता है। तेज हवा चलने पर धूल के महीन कण आसपास के गांवों और खेतों तक पहुंच सकते हैं, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ने की आशंका रहती है। साथ ही लोगों के स्वास्थ्य पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। बिना पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के डंपिंग किए जाने से दुर्घटनाओं और भूमि को नुकसान पहुंचने का खतरा भी बना रहता है।
विभागों की निगरानी पर उठ रहे सवाल
मामले को लेकर क्षेत्र के लोगों के बीच यह चर्चा है कि यदि डस्ट मटेरियल का परिवहन और डंपिंग नियमों के अनुरूप नहीं हो रहा है, तो संबंधित विभाग इसकी निगरानी क्यों नहीं कर रहे हैं। ग्रामीणों ने खनिज, राजस्व और वन विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने तथा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई करने की मांग की है।
अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि संबंधित विभाग इस मामले की जांच किस तरह करते हैं और पूरे घटनाक्रम की सच्चाई कब सामने आती है।







