चेन्नई:तमिलनाडु की राजनीति में पिछले कुछ समय से जारी कयासों और बड़े उलटफेर के बीच, पूर्व आईपीएस अधिकारी और तमिलनाडु बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई के राज्य में वापस लौटने पर समर्थकों ने उनका जोरदार स्वागत किया। बीजेपी छोड़ने की आधिकारिक घोषणा के बाद जब अन्नामलाई पहली बार सार्वजनिक रूप से तमिलनाडु पहुंचे, तो हवाई अड्डे से लेकर उनके गंतव्य तक समर्थकों और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली।
हवाई अड्डे पर उमड़ा जनसैलाब
अन्नामलाई के स्वागत के लिए सुबह से ही हवाई अड्डे के बाहर हजारों की संख्या में उनके समर्थक और प्रशंसक एकत्र होने लगे थे। जैसे ही वह एयरपोर्ट से बाहर निकले, पूरा परिसर “अन्नामलाई वाज़गा” (अन्नामलाई अमर रहें) और उनके समर्थन में नारों से गूंज उठा। पारंपरिक तमिल वाद्ययंत्रों (चेन्डा मेलम) की थाप, फूलों की बारिश और भव्य आतिशबाजी के साथ उनका स्वागत किया गया।
समर्थकों का कहना है:
“अन्नामलाई ने तमिलनाडु की राजनीति को एक नई दिशा दी है। वे बीजेपी में रहें या न रहें, हमारी निष्ठा उनके साथ है। उनके आने वाले राजनैतिक सफर में हम उनके साथ खड़े हैं।”
राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज़
अन्नामलाई का यह भव्य शक्ति प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब उनके बीजेपी छोड़ने के बाद तमिलनाडु की राजनीति में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों का जुटना यह साबित करता है कि अन्नामलाई की लोकप्रियता केवल एक पार्टी तक सीमित नहीं थी, बल्कि उन्होंने जमीनी स्तर पर अपनी एक मजबूत स्वतंत्र पहचान बनाई है।
आगे की राह पर सस्पेंस बरकरार
भव्य स्वागत से गदगद अन्नामलाई ने हाथ जोड़कर सभी प्रशंसकों और समर्थकों का आभार व्यक्त किया। हालांकि, उन्होंने मीडिया के सामने अपने अगले राजनीतिक कदम को लेकर पूरी तरह से पत्ते नहीं खोले हैं।
सूत्रों और राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, अन्नामलाई के पास भविष्य के लिए तीन मुख्य रास्ते दिख रहे हैं:
क्षेत्रीय दल का गठन:वे तमिलनाडु की राजनीति में एक नए ‘थर्ड फ्रंट’ के रूप में अपनी खुद की क्षेत्रीय पार्टी बना सकते हैं।
अन्य द्रविड़ दलों से हाथ मिलाना: राज्य के वर्तमान राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए किसी प्रमुख क्षेत्रीय दल के साथ गठबंधन की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
सामाजिक आंदोलन: राजनीति से इतर, वे जमीनी स्तर पर युवाओं और किसानों के मुद्दों को लेकर एक बड़ा सामाजिक मोर्चा भी शुरू कर सकते हैं।
बीजेपी से अलग होने के बाद भी अन्नामलाई को मिला यह जनसमर्थन यह साफ संकेत देता है कि आने वाले दिनों में तमिलनाडु की राजनीति और अधिक दिलचस्प होने वाली है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ‘सिंघम’ के नाम से मशहूर यह पूर्व अधिकारी अपनी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत कब और किस रूप में करता है।





