सुप्रीम कोर्ट को मिलेंगे 5 नए जज! कॉलेजियम ने केंद्र को भेजी सिफारिश

Madhya Bharat Desk
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देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में जजों की कमी को दूर करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने चार हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों और वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना के नाम सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के तौर पर नियुक्त करने की सिफारिश की है। यह फैसला 22 मई और 27 मई 2026 को हुई कॉलेजियम बैठकों में लिया गया।

कॉलेजियम की ओर से जिन नामों की सिफारिश की गई है, उनमें न्यायमूर्ति शील नागू, न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर, न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा, न्यायमूर्ति अरुण पल्ली और वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना शामिल हैं।

इन सिफारिशों को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि हाल ही में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने का फैसला लिया है। नए प्रावधान के तहत भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 33 से बढ़ाकर 37 कर दी गई है। माना जा रहा है कि इससे लंबित मामलों का बोझ कम करने और सुनवाई की रफ्तार बढ़ाने में मदद मिलेगी।

अगर केंद्र सरकार इन नामों को मंजूरी दे देती है और राष्ट्रपति की ओर से नियुक्ति वारंट जारी हो जाता है, तो सुप्रीम कोर्ट में खाली पड़े कई पद भर जाएंगे। इससे अदालत की कार्यक्षमता और मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।

बताया जा रहा है कि न्यायमूर्ति शील नागू मूल रूप से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से जुड़े रहे हैं और फिलहाल पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश हैं। वहीं न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर वर्तमान में बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश हैं और उनका मूल हाईकोर्ट झारखंड हाईकोर्ट है।

इसी तरह न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा फिलहाल मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश हैं और पहले दिल्ली हाईकोर्ट से जुड़े रहे हैं। जबकि न्यायमूर्ति अरुण पल्ली इस समय जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश हैं और उनका मूल हाईकोर्ट पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट है।

कॉलेजियम ने वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना को सीधे सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश बनाए जाने की सिफारिश भी की है। बार से सीधे सुप्रीम कोर्ट में नियुक्तियां कम देखने को मिलती हैं, इसलिए इसे कानूनी क्षेत्र में उनके अनुभव और योगदान की बड़ी मान्यता माना जा रहा है।

अब सभी सिफारिशें केंद्र सरकार के पास भेजी जाएंगी। इसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी और अधिसूचना जारी होने पर नियुक्तियों की प्रक्रिया पूरी होगी। सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों को कम करने के लिहाज से कॉलेजियम का यह कदम काफी अहम माना जा रहा है।

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