बालोद जिले में वन विभाग ने पानी बचाने के लिए एक नया और आसान तरीका अपनाया है, जिसकी खूब चर्चा हो रही है। लगातार घटते भू-जल स्तर और गर्मी में पानी की कमी को देखते हुए विभाग ने “जल संचय जन भागीदारी अभियान” और “नीर चेतना अभियान” के तहत यह पहल शुरू की है।
इस अभियान के तहत छोटे नालों और पानी के बहाव वाले स्थानों पर पुराने और बेकार हो चुके बोरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन बोरियों में मिट्टी और मुरुम भरकर अस्थायी बांध बनाए जा रहे हैं, जिन्हें “बोरी बंधान” कहा जा रहा है। इससे बारिश का पानी तेज़ी से बहकर बाहर नहीं जाता, बल्कि रुककर धीरे-धीरे जमीन में समा जाता है। इससे भू-जल स्तर बढ़ाने और मिट्टी के कटाव को रोकने में मदद मिल रही है।

गुरुवार शाम बालोद-दल्ली मार्ग पर दईहान मोड़ के पास शिव मंदिर क्षेत्र में वन विभाग ने एक और बोरी बंधान तैयार किया। इस मौके पर डीएफओ अभिषेक अग्रवाल, वन विभाग के अधिकारी, स्थानीय कर्मचारी और जिला प्रेस क्लब के सदस्य भी मौजूद रहे और उन्होंने श्रमदान किया।
वन विभाग के अनुसार शुरुआत में 500 बोरी बंधान बनाने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन लोगों की भागीदारी और काम की गति को देखते हुए अब तक 600 से ज्यादा बंधान तैयार किए जा चुके हैं। यह काम बालोद, डौंडी, डौंडीलोहारा, दल्लीराजहरा और गुरुर क्षेत्रों में तेजी से चल रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि इस तरीके से जहां पानी जमीन में ज्यादा रुक रहा है, वहीं आसपास की मिट्टी में नमी भी बढ़ रही है, जिससे पेड़-पौधों की वृद्धि और जंगलों की हरियाली को फायदा मिल रहा है।
वन विभाग की यह पहल कम खर्च में ज्यादा असर देने वाली मानी जा रही है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ऐसे छोटे-छोटे प्रयास लगातार किए जाएं और लोगों की भागीदारी बनी रहे, तो आने वाले समय में पानी की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।



