छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले, जो खुद मुख्यमंत्री का गृह क्षेत्र है, वहां जंगलों में आग लगने की घटनाएं लगातार चिंता का विषय बनती जा रही हैं। गर्मी बढ़ते ही हालात और भी गंभीर हो जाते हैं, जहां लगभग हर दिन सैकड़ों स्थानों पर आग लगने की घटनाएं सामने आती हैं।
इन आगजनी की घटनाओं से हर साल सैकड़ों एकड़ वन क्षेत्र बर्बाद हो जाता है। जंगलों में रहने वाले वन्यजीवों का जीवन खतरे में पड़ जाता है और पर्यावरण को भी गहरा नुकसान पहुंचता है।
चौंकाने वाली बात यह है कि वन विभाग पर भारी-भरकम बजट खर्च होने के बावजूद जमीनी स्तर पर काम कर रहे कर्मचारियों के पास आग बुझाने के लिए जरूरी आधुनिक उपकरणों और संसाधनों की भारी कमी है। कई जगहों पर कर्मचारी सीमित साधनों के सहारे ही आग पर काबू पाने की कोशिश करते नजर आते हैं।
जब विभाग के पास पर्याप्त बजट है, तो आखिर फील्ड में काम कर रहे अमले को जरूरी सुविधाएं क्यों नहीं मिल पा रही हैं। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि जंगलों की सुरक्षा को भी गंभीर खतरे में डालती है।



