प्रदेश के पांच सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के एक साथ इस्तीफे से न्याय जगत में हलचल तेज हो गई है और इस फैसले को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
हाईकोर्ट की सिफारिश के बाद विधि एवं विधायी कार्य विभाग ने इन सभी जजों के इस्तीफे को स्वीकार करते हुए अप्रैल माह में उन्हें कार्यमुक्त करने का आदेश जारी कर दिया है।
इस्तीफा देने वाले जजों में द्विव सिंह सेंगर, प्रियदर्शन गोस्वामी, नंदनी पटेल, भामिनी राठी और अर्पित गुप्ता शामिल हैं। सभी ने अपने त्यागपत्र में “व्यक्तिगत कारणों” का हवाला देकर इस्तीफा दिया है।
कानूनी विशेषज्ञों और वरिष्ठ अधिवक्ताओं के बीच इस फैसले को लेकर संदेह जताया जा रहा है कि इतने कठिन चयन प्रक्रिया से गुजरकर नियुक्त हुए न्यायिक अधिकारियों का एक साथ इस्तीफा देना साधारण बात नहीं है, और इसके पीछे कोई गहरी वजह हो सकती है।



