छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक संवेदनशील मामले में प्रशासन की सख्ती देखने को मिली। कैंसर से जूझ रही एक महिला व्याख्याता को लंबे समय से इलाज के लिए मिलने वाली राशि नहीं मिल पा रही थी, लेकिन अब उन्हें बड़ी राहत मिल गई है।
कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत कार्रवाई की। लापरवाही बरतने वाले संबंधित बाबू को निलंबित कर दिया गया, वहीं प्राचार्य को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए।
दरअसल, पीड़ित व्याख्याता ने आर्थिक तंगी के बीच अपने इलाज के लिए मदद की गुहार लगाई थी। जब मामला कलेक्टर तक पहुंचा, तो उन्होंने बिना देरी किए जिला शिक्षा अधिकारी को जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद तेजी से प्रक्रिया पूरी करते हुए महज दो दिनों के भीतर करीब 2 लाख रुपए की चिकित्सा प्रतिपूर्ति राशि स्वीकृत कर दी गई और भुगतान के लिए जारी कर दी गई।
जांच में यह बात सामने आई कि व्याख्याता ने अपने स्कूल में आवेदन तो दिया था, लेकिन सहायक ग्रेड-03 कर्मचारी ने उसे आगे उच्च कार्यालय तक भेजा ही नहीं। इस लापरवाही को गंभीर मानते हुए तत्काल प्रभाव से बाबू को सस्पेंड कर धरसींवा स्थित विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में अटैच किया गया है।
कलेक्टर ने साफ कहा कि जरूरतमंदों के मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे सभी लंबित मामलों का संवेदनशीलता के साथ जल्द निपटारा किया जाए, ताकि किसी भी पीड़ित को समय पर मदद मिल सके।



