रायपुर।छत्तीसगढ़ का शिक्षा विभाग इन दिनों अदालती मामलों के बड़े बोझ से जूझ रहा है। पुरानी पेंशन, क्रमोन्नति, प्रमोशन और जीपीएफ से रकम निकासी जैसे मुद्दों को लेकर 14 हजार से अधिक प्रकरण विभाग के सामने हैं। मामलों की निगरानी और कोर्ट में जवाब तैयार करने के लिए विभाग को दो अधिकारियों की जिम्मेदारी सौंपनी पड़ी है।
पुरानी पेंशन पर सबसे बड़ा टकराव
अनुमानित आंकड़ों के अनुसार, इन मामलों में सबसे अधिक यानी करीब 6 हजार प्रकरण पुरानी पेंशन से जुड़े हैं। शिक्षकों की मांग है कि 1998 से शिक्षाकर्मी के रूप में की गई सेवा को पेंशन की गणना में शामिल किया जाए। लेकिन शासन 2018 में संविलियन के बाद की सेवा को ही मान्य मान रहा है, जिससे विवाद लगातार बढ़ रहा है।
क्रमोन्नति और प्रमोशन के हजारों केस
पुरानी पेंशन के बाद क्रमोन्नति से जुड़े करीब 5 हजार मामले लंबित हैं। इसके अलावा प्रमोशन को लेकर भी लगभग एक हजार प्रकरण अदालत पहुंच चुके हैं। शिक्षकों का कहना है कि उनकी वरिष्ठता और सेवा अवधि के बावजूद पदोन्नति में देरी हो रही है।
जीपीएफ निकासी पर गंभीर सवाल
जीपीएफ से जुड़ी 400 से अधिक शिकायतों ने विवाद को और गंभीर बना दिया है। शिक्षकों का दावा है कि उनके खातों से बिना उनकी जानकारी या अनुमति के लाखों रुपये निकाले गए। कुछ प्रकरणों में 40 लाख से 90 लाख रुपये तक की कथित निकासी सामने आई है।
समस्या यह है कि कई मामलों में पुराने रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। इसके चलते राशि की रिकवरी, जिम्मेदारी तय करने और प्रभावित शिक्षकों को भुगतान देने की प्रक्रिया अटकी हुई है। हाल ही में हाईकोर्ट ने भी रिटायरमेंट के छह महीने बाद जीपीएफ की वसूली को अवैध मानते हुए एक रिटायर्ड शिक्षक को राहत दी थी।
टीईटी बना प्रमोशन की नई पेंच
प्रमोशन को लेकर अब शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी भी बड़ा विवाद बन गया है। एक वर्ग के शिक्षक वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति चाहते हैं, जबकि टीईटी पास शिक्षक पात्रता पूरी होने के बावजूद प्रमोशन न मिलने का विरोध कर रहे हैं। टीईटी को पदोन्नति के लिए अनिवार्य बनाने के फैसले को लेकर मामला हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है।
हाईकोर्ट ने पदोन्नति प्रक्रिया पर पूरी रोक नहीं लगाई है, लेकिन स्पष्ट किया है कि इस दौरान होने वाली नियुक्तियां याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगी। इस बीच शासन ने पदोन्नति चाहने वाले शिक्षकों के लिए साल में दो बार विशेष टीईटी आयोजित करने की तैयारी भी बताई है।
सवाल है जवाबदेही का
शिक्षक संगठनों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में अदालती मामले इस बात का संकेत हैं कि विभागीय निर्णयों में पारदर्शिता, समयबद्धता और रिकॉर्ड प्रबंधन की कमी है। पुरानी पेंशन और जीपीएफ जैसे मामलों में देरी सीधे शिक्षकों के भविष्य, सेवानिवृत्ति और आर्थिक सुरक्षा को प्रभावित कर रही है।
अब देखना होगा कि शासन इन हजारों प्रकरणों का समाधान कितनी जल्दी और कितनी पारदर्शी तरीके से कर पाता है। जब तक रिकॉर्ड, नियम और जिम्मेदारी को लेकर स्पष्टता नहीं आती, शिक्षकों को अदालत के चक्कर लगाने पड़ेंगे और विभाग पर मुकदमों का बोझ बढ़ता रहेगा।





