रायपुर सांसद एवं संसद की प्राक्कलन समिति के सदस्य बृजमोहन अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ समेत देश में बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए सौर ऊर्जा और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर अधिक ध्यान देने की जरूरत बताई है। सोमवार को संसद में ‘पावर प्लांट: मुद्दे और चुनौतियां’ विषय पर आयोजित प्राक्कलन समिति की बैठक के बाद उन्होंने यह बात कही।
बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए पारंपरिक कोयला आधारित ऊर्जा के साथ-साथ सौर और अन्य हरित ऊर्जा स्रोतों पर भी विशेष रूप से काम किया जाना चाहिए। उन्होंने छत्तीसगढ़ में कोयले की उपलब्धता के बावजूद कई ताप विद्युत संयंत्रों को कोयले की नियमित आपूर्ति में आने वाली दिक्कतों का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि राज्य के कुछ निजी पावर प्लांट कोयले की अनियमित आपूर्ति और बिजली के लिए पर्याप्त खरीदार नहीं मिलने जैसी समस्याओं से प्रभावित हैं। वहीं, तकनीकी खराबी या विद्युत फॉल्ट के कारण बड़े पावर प्लांट की इकाइयों के अचानक बंद होने से बिजली आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है।
सांसद ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों को देखते हुए बिजली उत्पादन के लिए सौर ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे हरित विकल्पों को बढ़ावा देना जरूरी है।
30,671 मेगावाट हुई स्थापित क्षमता
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, छत्तीसगढ़ की वर्तमान कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता करीब 30,671 मेगावाट है। वर्ष 2000 में राज्य की स्थापित क्षमता लगभग 1,400 मेगावाट थी। राज्य की मौजूदा क्षमता में तापीय ऊर्जा के साथ जलविद्युत, सौर और बायोमास जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत भी शामिल हैं।
आगामी 5 से 7 वर्षों में थर्मल, न्यूक्लियर, सोलर और हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स के माध्यम से करीब 31,000 मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि इस अतिरिक्त क्षमता को विकसित करते समय सौर ऊर्जा और अन्य नवीकरणीय स्रोतों को अधिक प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि छत्तीसगढ़ की ऊर्जा क्षमता बढ़ने के साथ पर्यावरणीय दृष्टि से भी टिकाऊ विकल्पों को प्रोत्साहन मिले।





