छत्तीसगढ़ में जमीन से जुड़े बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। संयुक्त किसान मोर्चा और सर्व छत्तीसगढ़ी किसान समाज के पदाधिकारी और राज्य आंदोलनकारी अनिल दुबे ने कहा कि बाहरी लोगों द्वारा लाखों हेक्टेयर शासकीय, वन और आदिवासी जमीनों पर कथित रूप से कब्जा किया गया है।
आरोप है कि कुछ राजस्व और प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत से कूट रचित दस्तावेज तैयार कर फर्जी रजिस्ट्री कराई गई, इसमें अवैध करणी कृपा कंपनी भी शामिल है जिसके खिलाफ लंबे समय से विरोध किया जा रहा है।
रायपुर में आयोजित एक बैठक में किसान संगठनों के नेताओं अनिल दुबे, लाला राम वर्मा, चेतन देवांगन, छन्नू साहू, महेंद्र कौशिक, जगदंबा साहू, विमल ताम्रकार, रितु महंत, मनु बाई पटेल, श्यामा बाई ध्रुव और टुकेश्वरी ध्रुव सहित अन्य लोगों ने सरकार की “सुशासन” नीति पर सवाल उठाते हुए इसे जनता के साथ छल बताया।
उनका कहना है कि कई मामलों की शिकायतें तहसील और थानों में लंबित हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रभावित लोग लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही।
इस बीच किसान संगठनों ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर मामले की उच्च स्तरीय जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है।



