छत्तीसगढ़ में सरकार किसानों से देश में सबसे ज्यादा कीमत पर धान खरीदने का दावा करती है और इसे सालभर प्रचार में भी दिखाया जाता है। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर दिखा रही है।
बस्तर जिले के नियानार और बिरिंगपाल संग्रहण केंद्रों में करीब 14 हजार क्विंटल धान खुले में पड़ा-पड़ा खराब हो गया है। बारिश और नमी की वजह से धान भीग गया है, कई बोरों में तो अंकुर तक निकल आए हैं। अब यह धान खाने लायक नहीं बचा, बल्कि सड़कर लगभग बेकार हो चुका है।
जानकारी के अनुसार, पिछले खरीफ सीजन में इन दोनों केंद्रों में करीब 11 लाख क्विंटल धान का भंडारण किया गया था। नियमों के मुताबिक मिलर्स को समय पर इस धान का उठाव कर मिलिंग के लिए ले जाना था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
जिला विपणन अधिकारी की ओर से कई बार नोटिस जारी किए गए, लेकिन मिलर्स ने समय पर धान नहीं उठाया। इसी देरी की वजह से करीब 14 हजार क्विंटल धान वहीं रह गया और खुले में पड़ा-पड़ा खराब होता गया। सुरक्षा के लिए लगाए गए तिरपाल और प्लास्टिक शीट भी बारिश को नहीं रोक पाए।
अब स्थिति यह है कि करोड़ों रुपये का सरकारी धान बर्बाद हो गया है। अनुमान के मुताबिक इससे सरकार को सवा चार करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि जिस अनाज को गरीबों तक पहुंचना था, वह अब पूरी तरह खराब होकर बेकार हो गया है।
इस पूरे मामले में अब तक प्रशासन की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है और नुकसान की भरपाई कैसे होगी, इस पर भी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।


