बंगाल में रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग, तमिलनाडु में भी बंपर हाजिरी

Madhya Bharat Desk
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बंगाल में रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग, तमिलनाडु में भी बंपर हाजिरी
पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण में जनता ने लोकतंत्र के महापर्व में अपनी उपस्थिति से इतिहास रच दिया है।

चुनाव आयोग के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक पश्चिम बंगाल में शाम 5 बजे तक लगभग 89.93–90% तक वोटिंग दर्ज की गई, जो राज्य के पिछले सभी चुनावों के मुकाबले रिकॉर्डतोड़ स्तर है।

तमिलनाडु में भी 234 विधानसभा सीटों पर शाम 5 बजे तक लगभग 82.24% तक मतदान हुआ, जो राज्य के इतिहास में अब तक का सबसे अधिक दर माना जा रहा है। दोनों राज्यों में शाम 6 बजे तक वोटिंग जारी रही, ऐसे में आखिरी घंटे में 2–3 फीसदी तक वोटिंग बढ़ने की उम्मीद से बंगाल में 90–95% तक जाने की चर्चा है |

बंगाल और तमिलनाडु: वोटिंग का दंग कर देने वाला आंकड़ा

• पश्चिम बंगाल में वोटिंग प्रतिशत
• 2016: 82.66%
• 2021: 83.17%
• 2026: 89.93% (रिकॉर्ड तोड़ स्तर)

तमिलनाडु में वोटिंग प्रतिशत
• 2016: 74.24%
• 2021: 72.73%
• 2026: 82.24% (अब तक का सर्वाधिक)

विशेषज्ञ इस तरह की उच्च वोटिंग को न केवल जन‑भागीदारी का संकेत बता रहे हैं, बल्कि राजनीतिक नक्शा बदलने की ओर भी इशारा कर रहे हैं।

उच्च वोटिंग के पीछे क्या हैं कारण?

• अपडेटेड मतदाता सूची: मतदाता नामावलियों में विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद नए नाम जुड़े, गलत नाम निकले और वोटर लिस्ट अधिक सटीक होने से लोगों में भरोसा बढ़ा, जिससे बड़ी संख्या में लोग बूथ पर पहुंचे।

• महिलाओं का जोर‑दार जुड़ाव: बूथों पर लंबी कतारों में महिलाएं, युवा और बुजुर्ग सभी संख्या में नजर आए। ग्रामीण क्षेत्रों में खास तौर पर महिलाओं का उत्साह जन‑भागीदारी के लिए सबसे बड़ा इंजन बताया जा रहा है।

राजनीतिक दावों में तेजी

• प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस रिकॉर्ड वोटिंग को “बदलाव की ओर बढ़ते बंगाल” का संकेत बता रहे हैं और भाजपा इसे अपनी जन‑समर्थन की तस्वीर के रूप में पेश कर रही है।

• मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और TMC इस भागीदारी को जनता के SIR और राजनीतिक दबाव के खिलाफ जन‑व्यंग्य के रूप में दिखा रही है, जबकि तमिलनाडु में DMK, AIADMK और नए दल सभी उच्च वोटिंग को अपने पक्ष में रुझान के रूप में बता रहे हैं।

हिंसा‑सुरक्षा और चुनावी माहौल

• मुर्शिदाबाद, मालदा और कुछ अन्य संवेदनशील इलाकों में बम हमले, पत्थरबाजी और कार्यकर्ताओं के बीच झड़पों की घटनाएं सामने आईं, जिस पर केंद्रीय बलों और राज्य पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने के लिए दखल देना पड़ा।

• एक जगह बूथ पर बूढ़ी महिला मतदाता की मौत जैसी दुखद घटना ने माहौल को भारी किया, लेकिन इसके बावजूद लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ और शाम तक वोटिंग दर और मजबूत होती दिखी।

देश के अन्य राज्यों से तुलना

• असम, अरुणाचल प्रदेश और पुडुचेरी में भी हाल के चुनावों में 85–90% के आसपास वोटिंग दर्ज हुई थी, जिन्हें राज्य‑स्तरीय रिकॉर्ड माना गया।

• बंगाल और तमिलनाडु जैसे बड़े राज्यों में अब उसी स्तर से आगे बढ़ती भागीदारी ने यह संकेत दिया है कि आने वाला दौर छोटे और बड़े दोनों तरह के राज्यों में उच्च वोटिंग की नई मिसाल पेश कर सकता है।

आगे क्या?

अगर आखिरी घंटे में अनुमान के अनुसार 2–3% वोटिंग बढ़ती है, तो बंगाल का वोटिंग प्रतिशत 90 से 95% तक जा सकता है, जो भारत के बड़े राज्यों में अब तक का सबसे ऊंचा स्तर माना जाएगा। जबकि तमिलनाडु ने अपने पिछले रिकॉर्ड को खुद पीछे छोड़ते हुए नए इतिहास का दरवाजा खोल दिया है।

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