रायगढ़ में रेत माफिया का नेटवर्क अब खुलकर सामने आ रहा है। खनिज विभाग की छापेमारी में 6 वाहन जब्त हुए, 1.20 लाख का जुर्माना लगा—लेकिन असली खेल अभी भी जारी है।
खरसिया के लेबड़ा, उसरौट और डुमरपाली में दबिश के दौरान मांड नदी से पोकलेन मशीनों से हो रहे अवैध उत्खनन का खुलासा हुआ। रेत को गढ़उमरिया में डंप कर 2200 रुपये प्रति ट्रैक्टर बेचा जा रहा था। खेतों के किनारे बड़े पैमाने पर भंडारण इस बात का सबूत है कि ये सिर्फ चोरी नहीं, पूरा संगठित कारोबार है।
ग्रामीणों का आरोप सीधा है—“बिना संरक्षण इतना बड़ा खेल संभव नहीं।” मांड नदी के घाटों पर दिन-रात ट्रैक्टर और डंपर दौड़ रहे हैं, लेकिन कार्रवाई सिर्फ छापेमारी तक सीमित नजर आ रही है।
जूटमिल के बोदाटिकरा में भी रेत का पहाड़ खड़ा है, जहां ऊंची कीमतों पर खुलेआम बिक्री हो रही है।
सबसे बड़ा सवाल—जब जिले में एक भी वैध रेत घाट चालू नहीं, तो ये रेत आखिर किसकी इजाजत से निकल रही है? 15 घाटों की नीलामी के बाद भी पर्यावरण मंजूरी अटकी है, लेकिन माफिया का कारोबार फुल स्पीड में है।
कार्रवाई हुई, लेकिन क्या सिस्टम सच में जागा है या ये सिर्फ दिखावे की सख्ती है? रायगढ़ में जवाब अभी बाकी है।



