अमेरिका में इस शनिवार एक बार फिर जनता का गुस्सा सड़कों पर साफ दिखाई दिया। ‘No Kings’ नाम से हुए इस बड़े विरोध प्रदर्शन में लाखों लोग शामिल हुए और उन्होंने राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की नीतियों, बढ़ती महंगाई और ईरान के साथ जारी तनाव के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई।
देश के अलग-अलग हिस्सों खासतौर पर न्यू यॉर्क सिटी और सन फ्रांसिस्को में लोगों ने सड़कों पर उतरकर मार्च निकाले। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लीं, नारे लगाए और गाने-नृत्य के जरिए अपना विरोध जताया। न्यूयॉर्क में मिडटाउन मैनहटन से निकली रैली में आप्रवासन नीतियों और ईरान युद्ध को लेकर खास नाराजगी देखने को मिली।
वहीं सैन फ्रांसिस्को में एम्बारकाडेरो प्लाजा से सिविक सेंटर तक मार्च करते हुए लोगों ने अमेरिकी झंडे के साथ-साथ यूक्रेन और ट्रांसजेंडर अधिकारों के समर्थन में भी बैनर उठाए। यह प्रदर्शन सिर्फ एक शहर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि छोटे कस्बों से लेकर बड़े महानगरों तक इसकी गूंज सुनाई दी।
दरअसल, पश्चिम एशिया में पिछले एक महीने से चल रहा संघर्ष लगातार गंभीर होता जा रहा है। ईरान और इजरायल के बीच जारी हमलों में यूनाइटेड स्टेट्स की भूमिका को लेकर भी लोगों में असंतोष बढ़ा है। मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच हालात और तनावपूर्ण होते जा रहे हैं, जिसका असर अब अमेरिका की सड़कों पर भी दिख रहा है।
मिनेसोटा के सेंट पॉल में भी एक बड़ी रैली आयोजित हुई, जहां मशहूर रॉक सिंगर ब्रूस स्प्रिंगस्टीन ने प्रस्तुति दी। उन्होंने लोगों के साहस की सराहना की और हालिया घटनाओं में मारे गए नागरिकों को श्रद्धांजलि भी दी। राज्य के गवर्नर टिम वाल्ज ने भी फेडरल इमिग्रेशन नीतियों की आलोचना करते हुए लोगों के साथ खड़े होने की बात कही।
बताया जा रहा है कि ‘No Kings’ आंदोलन की यह तीसरी लहर है। इससे पहले भी इसी तरह के बड़े प्रदर्शन हो चुके हैं, जिनकी वजह महंगाई, ईंधन की बढ़ती कीमतें और आर्थिक दबाव रहे हैं।
हालांकि, वेस्ट पाल्म बीच में कुछ प्रदर्शनकारियों और ट्रंप समर्थकों के बीच हल्की झड़प की खबर सामने आई, लेकिन कुल मिलाकर पूरे देश में प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे। लोगों ने लोकतांत्रिक तरीके से सरकार की नीतियों और मौजूदा आर्थिक हालात के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की।



