देश की ऊर्जा सुरक्षा की मजबूत नींव मानी जाने वाली ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) आज गंभीर वित्तीय दबाव और घटते उत्पादन के कारण सवालों के घेरे में है।
साल 2014 तक स्थिति पूरी तरह अलग थी। उस समय भारत अपनी घरेलू जरूरत का करीब 27% तेल खुद पैदा करता था। ONGC उस दौर में पूरी तरह कर्ज मुक्त थी और उसके पास लगभग 13,000 करोड़ रुपये का सरप्लस भी मौजूद था।
लेकिन बीते करीब 12 वर्षों में हालात तेजी से बदले हैं। अब ONGC पर करीब 78,000 करोड़ रुपये का कर्ज हो चुका है। वहीं देश का घरेलू तेल उत्पादन घटकर सिर्फ 13% रह गया है, जिससे आयात पर निर्भरता बढ़ती जा रही है।
कंपनी की वित्तीय स्थिति पर असर डालने वाले कुछ बड़े फैसलों का भी जिक्र किया जा रहा है। ONGC के पास मौजूद सरप्लस नकदी का बड़ा हिस्सा गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (GSPC) के करीब 26,000 करोड़ रुपये के कर्ज को संभालने में खर्च किया गया।
इसके अलावा, ONGC से हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) की हिस्सेदारी खरीदवाई गई, जिससे करीब 36,000 करोड़ रुपये सीधे केंद्र सरकार के पास चले गए।
इन फैसलों के बाद ONGC की बैलेंस शीट पर दबाव बढ़ा और कंपनी की वित्तीय मजबूती कमजोर पड़ती गई।
इसी बीच, पेट्रोल और डीजल पर टैक्स के जरिए सरकार ने करीब 27-28 लाख करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया। बावजूद इसके, घरेलू उत्पादन में गिरावट ने ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं।
एक समय 27% तेल खुद उत्पादन करने वाला भारत अब सिर्फ 13% उत्पादन कर पा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि दशकों की मेहनत से बनाई गई ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा क्या कमजोर पड़ रही है, और क्या भविष्य में देश को आयात पर और ज्यादा निर्भर होना पड़ेगा।



