मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ईरान के राहत संगठन Iran Red Crescent Society के प्रमुख पीरहुसैन कोलिवंद का दावा है कि दोनों देशों ने मिलकर 80,000 से ज्यादा नागरिक ठिकानों पर हमले किए हैं। इन हमलों में स्कूल, अस्पताल और व्यापारिक प्रतिष्ठान भी शामिल हैं, जिससे भारी तबाही हुई है।
कोलिवंद के अनुसार, राजधानी तेहरान में ही करीब 20,000 हमले हुए, जबकि बाकी 60,000 हमले देश के अन्य हिस्सों में दर्ज किए गए। उन्होंने बताया कि इन हमलों में लगभग 18,790 व्यापारिक प्रतिष्ठानों, 266 मेडिकल सेंटर और 498 स्कूलों को नुकसान पहुंचा है। इसके साथ ही 12 स्वास्थ्यकर्मियों की मौत हुई है और 90 से ज्यादा घायल हुए हैं।
ईरानी अधिकारियों का कहना है कि इस संघर्ष में अब तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। कुछ रिपोर्ट्स में मृतकों की संख्या 1,500 से ज्यादा बताई जा रही है, जिससे हालात की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
इसी बीच Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने दावा किया है कि उसने एक इजरायली एफ-16 लड़ाकू विमान को मार गिराया है। वहीं सरकारी मीडिया के मुताबिक, ईरान ने तेल अवीव के पास स्थित Ben Gurion Airport पर सैन्य विमानों के ईंधन टैंकों को भी निशाना बनाया है।
तनाव के बीच ईरान के सैन्य प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फागरी ने चेतावनी दी है कि अगर संयुक्त अरब अमीरात की जमीन से ईरान पर हमले हुए, तो रास अल-खैमाह पर जवाबी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि ईरान अपनी संप्रभुता पर किसी भी हमले का जवाब उसी जगह देगा, जहां से हमला हुआ होगा।
गौरतलब है कि 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने तेहरान समेत कई शहरों पर हमले किए थे। इसके बाद से ही क्षेत्र में तनाव बढ़ गया और ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए, जिससे पूरा मध्य पूर्व एक बड़े संघर्ष की ओर बढ़ता नजर आ रहा है।



