दिव्यांग छात्रों के लिए चलाई जा रही अंब्रेला छात्रवृत्ति योजना में बड़ा घोटाला सामने आया है, जिसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में 11.4 करोड़ रुपये से ज्यादा की हेराफेरी का खुलासा हुआ है, जिसके बाद CBI ने पांच राज्यों में एक साथ कार्रवाई करते हुए कई नोडल अधिकारियों, फर्जी संस्थानों और संदिग्ध छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
जांच एजेंसी के मुताबिक, यह पूरा खेल दिव्यांग छात्रों के नाम पर फर्जी दस्तावेज़ और गैर-मौजूद संस्थानों के जरिए खेला गया। मामला दिल्ली, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक और जम्मू-कश्मीर तक फैला हुआ है।
यह छात्रवृत्ति योजना साल 2018 में शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर दिव्यांग छात्रों को पढ़ाई के लिए सहायता देना था। इसमें 11वीं-12वीं से लेकर ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स करने वाले छात्रों को लाभ दिया जाता था। लेकिन इसी योजना का गलत फायदा उठाकर फर्जीवाड़े का जाल बिछाया गया।
जांच में सामने आया है कि करीब 28 संस्थानों से जुड़े 926 छात्रों को 11.41 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति दी गई, जबकि इनमें से कई छात्र या तो अस्तित्व में ही नहीं थे या फिर उनके दस्तावेज़ संदिग्ध पाए गए।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कुछ संस्थान तो सालों पहले बंद हो चुके थे, लेकिन उनके नाम पर आज भी छात्रवृत्ति का दावा किया जा रहा था। उदाहरण के तौर पर, जम्मू-कश्मीर का एक कॉलेज 2017 से बंद था, फिर भी उसके नाम पर फर्जी आईडी बनाकर पैसा निकाला गया।
इसके अलावा, कई स्कूलों ने यह भी साफ किया कि उनके नाम का इस्तेमाल बिना जानकारी के किया गया। कुछ राज्यों के संस्थानों ने तो यह तक कहा कि उन्हें इस योजना के बारे में कोई जानकारी ही नहीं थी और जिन छात्रों के नाम दिखाए गए, वे कभी उनके यहां पढ़े ही नहीं।
जांच एजेंसी ने यह भी पाया कि कुछ मामलों में नोडल अधिकारी और छात्र मिलकर इस घोटाले को अंजाम दे रहे थे। लखनऊ के एक कॉलेज में 32 आवेदनों को आगे बढ़ाया गया, जिनमें से 24 को छात्रवृत्ति मिली और कई छात्रों ने पैसे भी निकाल लिए।
यह मामला सामने आने के बाद अब पूरे छात्रवृत्ति सिस्टम की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। सीबीआई की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस घोटाले से जुड़े और बड़े खुलासे हो सकते हैं।



