पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत और ईरान के रिश्तों की एक नई मिसाल सामने आई है। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले भारत के दो व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने की अनुमति दी है।
ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहाली ने कहा कि भारत के साथ दोस्ताना संबंधों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में अमेरिकी हमले के बाद भारत ने जिस तरह ईरान की मदद की, उसे तेहरान ने याद रखा है।
अमेरिकी हमले के बाद भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ
शनिवार को एक मीडिया समूह के कार्यक्रम में बोलते हुए फतहाली ने बताया कि 4 मार्च को ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस डेना पर अमेरिकी हमला हुआ था। इस हमले में जहाज पर मौजूद 100 से अधिक चालक दल के सदस्यों की मौत हो गई थी।
उन्होंने कहा कि इस मुश्किल समय में भारत सरकार ने ईरान का साथ दिया। जब कुछ देशों ने मदद से इनकार कर दिया, तब भारत ने सहयोग करने का फैसला किया।
कोच्चि बंदरगाह पर मिली शरण
हमले के बाद ईरान के दूसरे युद्धपोत आईआरआईएस लावन को भारत के कोच्चि बंदरगाह पर शरण दी गई। इस जहाज पर कुल 183 चालक दल के सदस्य मौजूद थे।
बताया गया कि इनमें से 50 से अधिक सदस्य फिलहाल कोच्चि में हैं, जबकि गैर-जरूरी कर्मचारियों को वापस भेज दिया गया है।
तकनीकी खराबी के कारण हुई आपातकालीन डॉकिंग
सूत्रों के मुताबिक, आईआरआईएस लावन में तकनीकी समस्या आ गई थी। इसी वजह से ईरान के अनुरोध पर 1 मार्च को इसे कोच्चि बंदरगाह पर आपातकालीन डॉकिंग की अनुमति दी गई।
बताया जा रहा है कि जहाज के ईरानी नाविक आर्मेनिया की राजधानी येरेवन से सड़क मार्ग के जरिए ईरान वापस जाएंगे।
ईरानी नागरिकों की भी हुई वापसी
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, जहाज के गैर-जरूरी चालक दल के साथ-साथ भारत में फंसे कई अन्य ईरानी नागरिकों को भी तेहरान की ओर से भेजे गए चार्टर्ड विमान से वापस भेजा गया।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह दिखाया है कि मुश्किल हालात में भी भारत और ईरान के बीच कूटनीतिक रिश्ते मजबूत बने हुए हैं।



