छत्तीसगढ़ में जल, जंगल, जमीन और पर्यावरण की रक्षा को लेकर एक बार फिर जनआंदोलन तेज होने जा रहा है। खनन और औद्योगिक परियोजनाओं के खिलाफ़ 16 जनवरी को अंबिकापुर जिला मुख्यालय में विशाल आंदोलन आयोजित किया जाएगा।
कोरबा, सरगुजा, जशपुर, सूरजपुर, बलरामपुर और कोरिया समेत कई जिलों से पहुंचे विभिन्न जनआंदोलनों के प्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए। आंदोलनकारियों का कहना है कि संवैधानिक ग्रामसभाओं द्वारा व्यक्त किए जा रहे विरोध को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है और दमनात्मक कार्रवाई कर ग्रामीणों को उनकी जंगल-जमीन से बेदखल किया जा रहा है।
आंदोलन से जुड़े लोगों ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार कॉरपोरेट कंपनियों, विशेषकर अडानी समूह जैसी बड़ी कंपनियों के हित में काम कर रही है। इससे आदिवासी और ग्रामीण समुदायों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष केवल विस्थापित होने वाले गांवों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे छत्तीसगढ़ के भविष्य की लड़ाई है। यदि इसी तरह खनन और औद्योगिक परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जाता रहा, तो राज्य की नदियां सूखने लगेंगी, पहाड़ उजड़ जाएंगे और जंगल समाप्त हो जाएंगे।

उन्होंने चेतावनी दी कि पर्यावरणीय विनाश का यह सिलसिला जारी रहा तो आने वाली पीढ़ियों के लिए छत्तीसगढ़ रहने योग्य नहीं बचेगा। इसलिए इस विनाशकारी नीति के खिलाफ़ सभी वर्गों को एकजुट होकर संघर्ष करना होगा।



