रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में शुक्रवार को उस समय हलचल तेज हो गई जब भाजपा और कांग्रेस—दोनों दलों के मीडिया विभागों द्वारा लगभग एक जैसी भाषा और विषय-वस्तु वाले दो आदेश जारी किए गए। दोनों ही आदेश टीवी डिबेट/बहस पर लगाए गए प्रतिबंध हटाने से जुड़े हैं।
पहले भाजपा ने कांग्रेस प्रवक्ता पर लगाए गए प्रतिबंध को समाप्त करने की सूचना जारी की, उसके कुछ ही दिनों के भीतर कांग्रेस प्रदेश मीडिया विभाग ने भी भाजपा प्रवक्ता पर लगाए गए प्रतिबंध को समाप्त करने का पत्र जारी किया। दोनों पत्रों की शैली, भाषा और प्रारूप की समानता ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा को जन्म दे दिया है।

कांग्रेस में अंदरूनी नाराज़गी भी आई सामने
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस प्रदेश संचार प्रमुख सुशीलानंद शुक्ला अपने अधिकारों में हस्तक्षेप को लेकर असंतुष्ट बताए जा रहे हैं। टीवी मीडिया से जुड़े फैसले आमतौर पर संचार विभाग के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, लेकिन यह नया आदेश संचार विभाग की बजाय सीधे प्रभारी महामंत्री (संगठन) मलकित सिंह गेदू द्वारा जारी किया गया।
इसे संचार प्रमुख के अधिकारों का अतिक्रमण माना जा रहा है।

दोनों आदेशों में समानता
एक तरफ दोनों दलों के पत्रों का लगभग समान समय पर जारी होना, दूसरी तरफ भाषा और प्रारूप में समानता- इन सबने राजनीतिक विशेषज्ञों को यह कहने पर मजबूर कर दिया है कि- क्या कांग्रेस और भाजपा में अंदर ही अंदर कोई सांठ गाँठ है?
हालाँकि दोनों दलों की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सोशल मीडिया पर यह मुद्दा तेजी से वायरल हो रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि यह विवाद केवल पत्रों की समानता तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे दोनों दलों के अंदरूनी समन्वय और निर्णय प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं।



