बच्चा चोर गिरोह 72 घंटे की रिमांड पर: छह ठिकानों पर छापेमारी, रंग-डिमांड पर करते थे गतिविधियां”

Madhya Bharat Desk
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जब किसी अपराध की प्रकृति संवेदनशील होती है — जैसे कि बच्चों की चोरी — तो समाज व कानून की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। हाल ही में, नालंदा, बिहारशरीफ और अन्य पांच स्थानों पर पुलिस ने 3 बच्चे चोर गिरोह के खिलाफ छापेमारी की और उन्हें 72 घंटे की रिमांड पर भेजा गया। यह कार्रवाई उस गिरोह की पैठ और कार्यशैली को उजागर करती है, जिसने “रंग-डिमांड” जैसी रणनीति अपनाकर अपनी गतिविधियाँ अंजाम द

घटना का विवरण

पुलिस ने एक सुनियोजित योजना के तहत छह स्थानों पर छापेमारी की, जिनमें नालंदा, बिहारशरीफ शामिल हैं।

गिरफ्तार किए गए व्यक्ति जिन शिकायतों के आधार पर पकड़े गए, उनमें “रंग-डिमांड” (रंग, अर्थात् वर्ण या रूप ?) और “डिमांड” (मांग) को आधार बनाकर वारदात करना शामिल था।

उन्हें 72 घंटे की रिमांड पर भेजा गया है, ताकि विस्तृत पूछताछ और जांच हो सके।

छापेमारी के दौरान शामिल स्थानों पर छापों में जुटी पुलिस टीम ने संभवतः सबूत जुटाए और आरोपी के नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश की।

यह कार्रवाई यह संकेत देती है कि पुलिस अपराधियों के मोबाइल, वित्तीय लेन-देन और संगठनात्मक लिंक की तह तक जाना चाहती है।

गिरोह की कार्यशैली और रणनीति

खबरों में यह सामने आया है कि यह गिरोह “ऑन-डिमांड” बच्चा चोरी करता था — यानी की उन दंपत्तियों को लक्ष्य बनाता था जो संतान नहीं पैदा कर पा रहे थे।

गिरोह अपना अपराध अंजाम इस तरह देता था कि बच्चे “रंग” या लक्षण के हिसाब से मांगे जाते थे — जैसे “गोरा, सांवला, हेल्दी” आदि वर्णन।

चोरी के बाद वे बच्चे को दलालों और मद्धपक्षों (middlemen) के माध्यम से उच्च रकम पर बेचते थे।

गिरोह के सदस्यों के मोबाइल सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) व अन्य डिजिटल ट्रैक्स की जांच की जा रही है, ताकि सम्पर्क और लेन-देन नेटवर्क को समझा जा सके।

यह पता चला है कि वे अस्पताल, आईवीएफ क्लिनिक आदि के नजदीक ऐसे दंपत्तियों को खोजते थे, जो बच्चे की चाह रखते थे, और उनसे संपर्क कर उनकी मांग के अनुरूप बच्चे चोरी करते थे।

चुनौतियाँ और सवाल

यदि गिरोह सीमाबद्ध हो, तो उन्होंने अन्य राज्यों में भी इसी तरह की कार्रवाई की थी या नेटवर्क फैला हुआ था?

आरोपी किस तरह पक्षों (दलाल, ग्राहक, पालक लोग) से संपर्क करते थे, और पैसों का लेन-देन कैसे होता था?

बच्चों की पहचान, स्वामित्व और कानूनी स्थिति कैसे तय की जाएगी?

दोषियों को दंड देना और भविष्य में ऐसे अपराधों को रोकने के लिए क्या नीतियाँ लागू हों?

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