महाराष्ट्र: मराठा आरक्षण को लेकर मनोज जरांगे का अनशन जारी, सरकार पर दबाव; भुजबल ने बुलाई OBC नेताओं की बैठक

Madhya Bharat Desk
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मुंबई।महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर से गर्मा गया है। सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे मुंबई के आजाद मैदान में पिछले कई दिनों से अनशन पर डटे हैं। उनका कहना है कि सरकार के पास 58 लाख रिकॉर्ड मौजूद हैं, जो यह साबित करते हैं कि मराठा समाज का संबंध कुणबी जाति से है। जरांगे की मांग है कि इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर तुरंत सरकारी प्रस्ताव (जीआर) जारी किया जाए।

सरकार पर देरी का आरोप, आंदोलनकारियों से शांति की अपील

जरांगे ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि वह आरक्षण के मुद्दे पर समय बर्बाद कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चाहे सरकार गोली चलाए, लेकिन वे पीछे नहीं हटेंगे। साथ ही, अपने समर्थकों से उन्होंने शांति बनाए रखने और किसी भी प्रकार की हिंसा से दूर रहने की अपील की।

जरांगे का कहना है कि सभी मराठों को कुणबी घोषित करना उचित नहीं होगा, बल्कि जो लोग आरक्षण चाहते हैं उन्हें इसका लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने पत्रकारों और नेताओं का सम्मान बनाए रखने की भी अपील की।

सुप्रिया सुले पर नारेबाजी, जरांगे ने दिया संदेश

अनशन स्थल पर उस समय हंगामा हो गया जब NCP (SP) सांसद सुप्रिया सुले जरांगे से मिलने पहुंचीं। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी की, वहीं कुछ जगह पत्रकारों से भी नोकझोंक हुई। इस पर जरांगे ने समर्थकों को फटकार लगाई और कहा कि किसी भी मेहमान के साथ दुर्व्यवहार नहीं होना चाहिए।

भुजबल की अगुवाई में OBC नेताओं की बैठक

इस बीच, राज्य के वरिष्ठ मंत्री और NCP नेता छगन भुजबल ने मुंबई में OBC नेताओं की अहम बैठक बुलाई है। भुजबल का कहना है कि न तो कालेकर आयोग और न ही मंडल आयोग ने मराठों को पिछड़ा वर्ग घोषित किया था। उन्होंने साफ कहा कि मुख्यमंत्री को किसी जाति को पिछड़ा घोषित करने का अधिकार नहीं है।

अदालतों का रुख और राजनीतिक हलचल

भुजबल ने अदालतों के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि मराठा और कुणबी एक नहीं हैं। उनका कहना है कि यह मामला केवल आयोग की सिफारिश और अदालत के फैसले से ही तय हो सकता है।

महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण की मांग नई नहीं है। राज्य की लगभग 30% आबादी मराठा समाज से आती है और वे शिक्षा व नौकरी में प्रतिनिधित्व की मांग लंबे समय से करते आ रहे हैं। पिछली बार भी यह मामला अदालत में अटक चुका है। अब जरांगे का आंदोलन एक बार फिर इस विवाद को राजनीतिक मोड़ दे रहा है।

OBC समाज की चिंता और सरकार की दुविधा

जरांगे की मांग से OBC संगठनों में चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि अगर मराठों को OBC कोटे में आरक्षण दिया गया तो मौजूदा लाभार्थियों पर असर पड़ेगा। इसी कारण भुजबल और अन्य OBC नेता रणनीति बना रहे हैं।
फडणवीस सरकार पर दोहरा दबाव है—एक तरफ मराठा समाज का आक्रोश और दूसरी तरफ OBC वर्ग का विरोध। आने वाले दिनों में यह मुद्दा महाराष्ट्र की राजनीति का बड़ा केंद्र बनने वाला है।

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