बिहार में शराबबंदी पर प्रशांत किशोर का निशाना: “दिखावटी कानून, गरीबों पर अत्याचार”

Madhya Bharat Desk
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पटना: जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बिहार में लागू शराबबंदी कानून को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यह कानून सिर्फ दिखावा बनकर रह गया है, जिसका इस्तेमाल गरीब, दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्गों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। जन सुराज ने इस “फर्जी शराबबंदी” को खत्म करने की बात कही है।

प्रशांत किशोर ने दावा किया कि दुनिया में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है जिससे यह साबित हो कि शराबबंदी से समाज का व्यापक हित हुआ हो।

“महात्मा गांधी ने भी कभी यह नहीं कहा कि शराबबंदी से समाज का कल्याण सुनिश्चित होता है,” उन्होंने कहा।

उन्होंने यह भी बताया कि शराबबंदी कानून लागू होने के बाद अब तक 8 लाख से अधिक मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें 6 लाख से ज्यादा मामलों पर अदालत ने संज्ञान लिया है। इसके अलावा, 1.20 लाख से अधिक लोग आज भी जेलों में अंडर ट्रायल हैं।

उन्होंने सवाल उठाया:

“जाकर पता करिए कि जेलों में बंद इन कैदियों में कितने लोग दलित, महादलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदाय से हैं। यह कानून असल में गरीबों को फंसाने का माध्यम बन गया है।”

 मुख्य तथ्य:

तथ्य आंकड़े / जानकारी
शराबबंदी से जुड़े केस 8 लाख से ज्यादा
कोर्ट द्वारा संज्ञान 6 लाख से अधिक मामलों में
जेल में अंडर ट्रायल 1.20 लाख से ज्यादा लोग
प्रभावित वर्ग दलित, पिछड़े, गरीब और अल्पसंख्यक वर्ग

प्रशांत किशोर का यह बयान एक बार फिर बिहार की शराबबंदी नीति को लेकर राजनीतिक बहस को तेज कर सकता है। जन सुराज का दावा है कि अगर वह सत्ता में आते हैं, तो इस “नकली और शोषणकारी शराबबंदी” को खत्म करेंगे।

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