दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में एक बहुस्तरीय ज़मीन घोटाले का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें सरकारी जमीन को डिजिटल रिकॉर्ड ‘भुइयां’ पोर्टल में छेड़छाड़ करके निजी नाम पर दर्ज किया गया। इसके बाद इन ज़मीनों को गिरवी रखकर विभिन्न बैंकों से करोड़ों रुपये का लोन लिया गया। मामले में राजस्व विभाग, बैंक अधिकारी और भूमाफियाओं के गठजोड़ की बू आ रही है।
कहां-कहां हुआ घोटाला?
दुर्ग जिले के चार गांव — मुरमुंदा, अछोटी, चेटुवा और बोरसी इस पूरे घोटाले के केंद्र में हैं। यहां 250 एकड़ से अधिक जमीन को फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से निजी स्वामित्व में दिखाकर फर्जी खसरे और दाखिल-खारिज किए गए।
भुइयां पोर्टल में डिजिटल धोखाधड़ी
ऑनलाइन भू-अभिलेख प्रणाली में जानबूझकर खसरा नंबरों की हेराफेरी की गई, जिससे असली सरकारी जमीन पर फर्जी व्यक्तियों के नाम चढ़ाए गए।
अछोटी गांव में 191 एकड़ चारागाह भूमि को 52 फर्जी खसरों में बांटकर बैंक से लोन लिया गया।
जाली दस्तावेज और संदिग्ध लोन प्रोसेसिंग
- दीनू राम यादव के नाम पर 46 लाख का लोन
- एस राम पिता बुद्ध राम के नाम 36 लाख रुपये का कर्ज
1546/4 खसरा का जिक्र, जबकि वहां पर शासकीय डाइट संस्थान की ज़मीन स्थित है।
जांच के घेरे में ये नाम:
1. दीनू राम यादव
2. एस राम
3. शियाकांत वर्मा
4. हरिश्चंद्र निषाद
5. सुरेंद्र कुमार
इनके नाम पर लोन बुकिंग के दस्तावेज मिले, जिनमें फर्जी क्षेत्र निर्धारण, अवैध कब्जा, और जाली खसरा प्रमाणपत्र शामिल हैं।
बैंक अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध
- विशेष रूप से स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के अधिकारियों की भूमिका पर सवाल।
- बिना स्थल निरीक्षण के जारी किए गए करोड़ों के लोन।
राज्यव्यापी स्तर पर फैला नेटवर्क
- यह घोटाला सिर्फ दुर्ग तक सीमित नहीं — रायपुर, कोरबा, कोरिया, जांजगीर और चांपा जिलों में भी इसी तरह के फर्जीवाड़े सामने आ रहे हैं।
- आरोप है कि पटवारियों की लॉगिन ID हैक कर फर्जी खसरे बनाए गए।
- ईडब्ल्यूएस श्रेणी की जमीनें भी इसी तरह बेची गईं, जैसे भिलाई की मैत्री विहार सोसाइटी में।
सरकार ने शुरू की कार्रवाई
- संबंधित एसडीएम ने भूमि त्रुटि सुधार के निर्देश दिए।
- कलेक्टर स्तर पर जांच शुरू।
- सरकार ने कहा: “जहां भी शासकीय जमीन पर फर्जी दावे पाए जाएंगे, उन्हें तत्काल वापस लिया जाएगा और दोषियों पर कार्रवाई होगी।”
बड़े सवाल जो अभी बाकी हैं:
- क्या इस बार कार्रवाई निष्पक्ष और निष्कलंक होगी?
- क्या घोटाले के मास्टरमाइंड सामने आएंगे?
- क्या सीबीआई या ईडी जैसी एजेंसियों को जांच सौंपी जाएगी?
छत्तीसगढ़ में यह ज़मीन घोटाला केवल भू-अभिलेखों की तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि एक संगठित भ्रष्टाचार सिंडिकेट की ओर इशारा करता है। यह प्रकरण बताता है कि राज्य में भू-प्रबंधन और बैंकिंग सिस्टम में पारदर्शिता, सुरक्षा और जवाबदेही की सख्त जरूरत है।



