गाजा पट्टी में मानवीय संकट गहराता जा रहा है। दीर अल-बलाह और गाजा सिटी में इस्राइली हवाई हमलों और गोलीबारी में कम से कम 25 फलस्तीनी मारे गए हैं। इन हमलों में कई नागरिक घायल हुए, जो सहायता ट्रकों की बाट जोह रहे थे। इस्राइल और अमेरिका द्वारा युद्धविराम वार्ता दलों को वापस बुलाने के बाद बातचीत पूरी तरह ठप हो गई है।
शिफा अस्पताल के कर्मचारियों ने बताया कि जिकिम क्रॉसिंग के पास मदद की प्रतीक्षा कर रहे अधिकांश लोग हमलों में मारे गए। इस्राइली सेना की ओर से इन घटनाओं पर कोई तत्काल टिप्पणी नहीं आई है।
गाजा सिटी में एक अपार्टमेंट पर हुए हमले में भी चार नागरिकों की मौत की पुष्टि हुई है। इस्राइली सेना का दावा है कि वह मानवीय सहायता ट्रकों को गाजा में प्रवेश की अनुमति दे रही है, जबकि संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि सैन्य प्रतिबंधों और सुरक्षा खतरों के चलते सहायता वितरण बाधित है।
पिछले सप्ताह भी जिकिम क्रॉसिंग पर ऐसी ही गोलीबारी में 79 फलस्तीनी मारे गए थे। उस वक्त इस्राइली सेना ने कहा था कि हजारों लोग खतरा बन सकते थे, इसलिए कार्रवाई की गई।
वर्तमान हालात में गाजा के लोगों को भुखमरी और कुपोषण का गंभीर खतरा है। संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों ने जल्द से जल्द युद्धविराम की मांग की है। अमेरिका, मिस्र और कतर की मध्यस्थता में चल रही बातचीत अब अनिश्चितकाल के लिए रुकी हुई है।
इस्राइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा है कि युद्धविराम के अलावा अन्य विकल्पों पर विचार किया जा रहा है, जबकि हमास ने उम्मीद जताई है कि बातचीत अगले सप्ताह फिर शुरू हो सकती है।
मानवाधिकार समूहों और चैरिटी संस्थाओं ने इस्राइल की नाकेबंदी और सहायता वितरण नीति की आलोचना की है, साथ ही यह भी बताया कि उनके स्वयं के स्टाफ को भी पर्याप्त भोजन नहीं मिल पा रहा है।



