बिहार के पूर्णिया जिले के बायसी प्रखंड के माला गांव से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। आरोप है कि एक पादरी, अनिल राय, लंबे समय से गांव के गरीब और असहाय परिवारों को पैसे, शिक्षा और सुविधाओं का लालच देकर उनका धर्म परिवर्तन करवा रहा था। इस घटना ने धार्मिक स्वतंत्रता के दुरुपयोग और समाज में फैलते वैमनस्य पर गहरी चिंता पैदा कर दी है।
कैसे हुआ खुलासा?
ग्रामीणों के अनुसार, पादरी अनिल राय अपने घर पर प्रार्थना सभाएं आयोजित करता था। शुरुआत में यह धार्मिक आयोजन लगते थे, लेकिन धीरे-धीरे इनमें भाग लेने वाले हिंदू परिवारों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया जाने लगा। बदले में उन्हें 20 हजार रुपये नकद, बच्चों की मुफ्त पढ़ाई और विदेश में नौकरी दिलाने जैसे प्रलोभन दिए जाते थे। कुछ ग्रामीण लालच में आकर धर्म बदल चुके थे, लेकिन कुछ ने इसका विरोध किया और इसकी सूचना विश्व हिंदू परिषद को दी।
ग्रामीणों की सतर्कता और पुलिस कार्रवाई
विश्व हिंदू परिषद के स्थानीय पदाधिकारियों और ग्रामीणों ने मिलकर इस पूरी योजना का भंडाफोड़ किया। गुरुवार को पादरी के घर पर छापा मारा गया, जहां से धार्मिक सामग्री, एक डायरी जिसमें नाम और भुगतान की जानकारी थी, और कुछ नकद रुपये जब्त किए गए। ग्रामीणों ने पादरी को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। इस दौरान गांव में काफी तनाव का माहौल बन गया, लेकिन किसी प्रकार की हिंसा नहीं हुई।
पादरी का पक्ष और प्रशासन की प्रतिक्रिया
पादरी अनिल राय ने खुद पर लगे सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह केवल प्रार्थना सभाएं करवाता था और किसी का भी धर्म परिवर्तन जबरन नहीं कराया गया। उसने यह भी कहा कि यह सब जमीन विवाद से जुड़ा एक षड्यंत्र है। दूसरी ओर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। थानाध्यक्ष ने मीडिया को बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए कानूनी कार्रवाई की जा रही है और दोषी पाए जाने पर कठोर दंड दिया जाएगा।



