जब बात ब्लड प्रेशर की होती है, तो अधिकांश लोग केवल इसके बढ़ने यानी हाई बीपी की ही चिंता करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रक्तचाप का कम होना यानी हाइपोटेंशन (Low Blood Pressure) भी उतना ही गंभीर और जानलेवा हो सकता है?
स्वस्थ व्यक्ति के लिए सामान्य रक्तचाप 120/80 mmHg माना जाता है। जब ये लगातार 90/60 mmHg से नीचे बना रहता है, तो यह हाइपोटेंशन की स्थिति होती है। यह शरीर के कई जरूरी अंगों – जैसे मस्तिष्क, हृदय और किडनी – तक रक्त की आपूर्ति में रुकावट पैदा करता है, जो घातक साबित हो सकता है।

लो ब्लड प्रेशर के कारण और नुकसान:
जब शरीर में रक्त का दबाव अत्यधिक कम हो जाता है, तो अंगों को पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषण नहीं मिल पाता, जिससे उनका कार्य प्रभावित होता है। इसकी वजह से:
- दिमाग को कम रक्त मिलने से चक्कर आना, बेहोशी और स्ट्रोक तक हो सकता है।
- दिल की पंपिंग कमजोर हो जाती है, जिससे दिल की धड़कन रुक सकती है।
- गुर्दे की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है, जिससे किडनी फेलियर का खतरा होता है।
- गर्भावस्था में लो बीपी भ्रूण के विकास में बाधा बन सकता है और गर्भपात तक का खतरा हो सकता है।

हाइपोटेंशन के लक्षण:
- लगातार कमजोरी और थकावट
- बार-बार चक्कर या बेहोशी आना
- आंखों के आगे धुंध छा जाना
- हाथ-पैर ठंडे पड़ जाना
- धड़कन धीमी होना

बचाव के उपाय:
- डॉक्टर की सलाह से सोडियम (नमक) का सेवन थोड़ा बढ़ाएं।
- दिन भर में पर्याप्त पानी पीते रहें ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे।
- दिन में 3 की बजाय 5-6 बार छोटे मील्स लें।
- अचानक लेटने या खड़े होने से बचें, धीरे-धीरे पोजिशन बदलें।
- अधिक देर तक खाली पेट न रहें।

जर्नल में क्या कहता है शोध:
जर्नल ऑफ द अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी के एक अध्ययन के अनुसार, जिन लोगों का सिस्टोलिक बीपी 90 mmHg से कम रहता है, उनमें समयपूर्व मृत्यु का खतरा अधिक पाया गया। यह दर्शाता है कि हाइपोटेंशन को भी मेडिकल इमरजेंसी की तरह गंभीरता से लेना चाहिए।



