रायपुर में कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने एक राजनीतिक सभा में ऐसा बयान दिया, जिसने सियासी हलकों में हलचल मचा दी। उन्होंने राहुल गांधी के हाल ही में दिए गए “लंगड़े घोड़े” वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यहां सभी अश्वमेध के घोड़े हैं। कोई लंगड़ा घोड़ा नहीं है।” पायलट का यह बयान ना सिर्फ संगठनात्मक बदलावों की चर्चा को हवा देता है, बल्कि पार्टी के भीतर चल रहे अंतर्विरोधों की ओर भी इशारा करता है।
उन्होंने साफ किया कि कांग्रेस में बदलाव की ज़रूरत है और पार्टी को जमीनी स्तर से पुनर्गठित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ कांग्रेस में हर कार्यकर्ता में दमखम है और सभी आगे बढ़ने की काबिलियत रखते हैं।
यह टिप्पणी ऐसे वक्त में आई है जब कांग्रेस देशभर में खुद को नए तेवरों और चेहरों के साथ पेश करने की कोशिश कर रही है। पायलट के इस बयान को संगठनात्मक असंतुलन और भीतरखाने की खींचतान से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
कुल मिलाकर, सचिन पायलट की रायपुर यात्रा और यह बयान एक बार फिर कांग्रेस के अंदर चल रही रणनीतिक उथल-पुथल की गवाही दे रहा है।



