छत्तीसगढ़ कांग्रेस में इन दिनों संगठनात्मक अनुशासन और नेतृत्व की भूमिका को लेकर नए सिरे से मंथन चल रहा है। रायपुर में आयोजित पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी की बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने अनुशासनहीनता के मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए पार्टी नेताओं को स्पष्ट संदेश दिया कि संगठन में अनुशासन सर्वोपरि है।
भूपेश बघेल ने खासतौर पर नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत को भी संबोधित करते हुए कहा कि विपक्ष की भूमिका केवल विधानसभा में सवाल पूछने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाना और सरकार की नाकामी को उजागर करना भी उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को “मुखर और निर्णायक” भूमिका निभानी चाहिए, जिससे जनता में कांग्रेस की मौजूदगी और प्रभाव महसूस हो।
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि कुछ कांग्रेस नेता पार्टी लाइन से हटकर बयानबाज़ी कर रहे हैं, जिससे आम जनता में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। इस पर भूपेश बघेल ने दो टूक शब्दों में कहा कि अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर संगठनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।
इस बैठक को आगामी रणनीतियों के लिहाज से अहम माना जा रहा है, क्योंकि लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के प्रदर्शन के बाद प्रदेश संगठन पर नए सिरे से आत्ममंथन और पुनर्गठन की ज़रूरत महसूस की जा रही है।



