अबूझमाड़, छत्तीसगढ़:
अबूझमाड़ के दूरदराज इलाकों में रहने वाले ग्रामीण दोहरी मार झेलने को मजबूर हैं। एक ओर नक्सली उनका राशन उठा ले जाते हैं, दूसरी ओर पुलिस उन्हें अपराधी समझकर प्रताड़ित करती है। ग्रामीणों का दर्द है कि वे दोनों पक्षों के बीच बुरी तरह फंस चुके हैं और उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
ग्रामीणों के गंभीर आरोप:
ग्रामीणों ने बताया कि पुलिस जवान गांव में आते हैं, नशा करते हैं, गांव वालों को बेवजह पीटते हैं, गालियां देते हैं और जबरन घरों से मुर्गियां और खाने-पीने का सामान उठा ले जाते हैं। कई लोगों ने दावा किया कि पुलिसवालों का बर्ताव नक्सलियों से भी ज्यादा डरावना हो गया है।
‘नक्सली राशन ले जाते हैं, पुलिस मारती है’:
ग्रामीणों का कहना है कि नक्सली जब भी राशन ले जाते हैं, तब वे डर के मारे विरोध नहीं कर पाते। लेकिन जब पुलिस आती है तो उनका रवैया मानो वे दुश्मन हों। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस उन्हें नक्सली समर्थक समझकर बेवजह परेशान करती है। गांववालों ने कहा, “हम दोनों ओर से पिस रहे हैं, नक्सली भी परेशान करते हैं और पुलिस भी।”
प्रशासन का पक्ष:
पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों के आरोपों को खारिज किया है। प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा बल नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति स्थापित करने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं और गांव वालों की सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है। अफसरों का कहना है कि कुछ झूठी अफवाहें नक्सलियों द्वारा फैलाई जा रही हैं ताकि सुरक्षा बलों की छवि खराब की जा सके।
ग्रामीणों की स्थिति बेहद नाजुक:
इस पूरे विवाद में सबसे बड़ी परेशानी गांव के आम लोगों को हो रही है। न वे खुलकर नक्सलियों का विरोध कर सकते हैं, न पुलिस की ज्यादती के खिलाफ आवाज उठा सकते हैं। दोनों पक्षों के बीच पिसते इन निर्दोष लोगों के लिए अब न्याय और शांति की मांग उठने लगी है।



