सिलेंडर संकट के बीच कालाबाजारी का खेल: सर्वे में 57% उपभोक्ता परेशान

Madhya Bharat Desk
3 Min Read

नई दिल्ली: देश के कई हिस्सों में एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता को लेकर उपभोक्ताओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार की ओर से आपूर्ति व्यवस्था को सामान्य बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ डीलरों और बिचौलियों की मुनाफाखोरी के कारण स्थिति बिगड़ती नजर आ रही है।

ऑनलाइन सर्वे प्लेटफॉर्म लोकल सर्कल्स द्वारा किए गए एक सर्वे में सामने आया है कि देश के करीब 57 प्रतिशत घरेलू उपभोक्ता गैस सिलेंडर की देरी से डिलीवरी या कालाबाजारी की समस्या झेल रहे हैं। यह सर्वे देश के 309 जिलों के उपभोक्ताओं की प्रतिक्रियाओं के आधार पर तैयार किया गया है।

आपूर्ति को लेकर अलग-अलग दावे

सर्वे में शामिल लोगों में से

  • 43% उपभोक्ताओं ने बताया कि उनके गैस डीलर ने आपूर्ति में किसी तरह की समस्या से इनकार किया।
  • 21% लोगों ने कहा कि डीलरों ने गैस की कमी की बात कही।
  • वहीं 32% उपभोक्ताओं को बताया गया कि सिलेंडर की सप्लाई में देरी हो सकती है।
  • करीब 4% लोगों ने इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी।

बुकिंग और डिलीवरी में परेशानी

सर्वे के अनुसार

  • 43% उपभोक्ताओं को बुकिंग और डिलीवरी में कोई खास दिक्कत नहीं हुई।
  • 29% लोगों ने कहा कि सिलेंडर उपलब्ध नहीं होने के कारण उनकी बुकिंग में देरी हुई।
  • 7% उपभोक्ताओं को सामान्य समय से अधिक इंतजार करना पड़ा।
  • 14% लोगों ने बताया कि मजबूरी में उन्हें अधिक कीमत देकर कालाबाजारी से गैस सिलेंडर खरीदना पड़ा।
  • जबकि 7% लोगों को सिलेंडर पाने के लिए बार-बार फॉलो-अप करना पड़ा।

अतिरिक्त पैसे वसूलने की शिकायत

सर्वे में शामिल करीब 36% लोगों का कहना है कि उनके इलाके में एलपीजी सिलेंडर की कालाबाजारी हो रही है। कई जगहों पर आपूर्तिकर्ता और बिचौलिए प्रति सिलेंडर 100 से 500 रुपये तक अतिरिक्त राशि वसूल रहे हैं।

कुछ मामलों में स्थिति और भी गंभीर है, जहां उपभोक्ताओं को सिलेंडर की असली कीमत से दो से चार गुना अधिक, यानी 1500 से 2500 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं।

कितने लोगों ने कितना अतिरिक्त भुगतान किया

सर्वे के मुताबिक

  • 39% लोगों ने कहा कि उनके क्षेत्र में कालाबाजारी से खरीदारी नहीं होती।
  • 8% उपभोक्ताओं को 100 रुपये तक अतिरिक्त खर्च करना पड़ा।
  • 11% लोगों ने 100 से 300 रुपये ज्यादा दिए।
  • 8% उपभोक्ताओं ने 300 से 500 रुपये तक अधिक भुगतान किया।
  • जबकि 8% लोगों ने 500 रुपये से भी ज्यादा अतिरिक्त राशि चुकाने की बात कही।
  • करीब 25% लोगों ने इस सवाल पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत नहीं किया गया और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो आम उपभोक्ताओं की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

Share on WhatsApp

Share This Article
Leave a Comment