‘भाई साहब’ किसे बचाया जा रहा है? 1500 करोड़ वाले वायरल वीडियो ने भाजपा के भीतर ही क्यों बढ़ाई बेचैनी

Madhya Bharat Desk
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पिछले दिनों छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रवक्ताओं की एक बंद कमरे की बैठक में कही गई एक बात ने पार्टी और सत्ता के गलियारों में खलबली मचा दी। चर्चा का विषय था 1500 करोड़ रुपये की कथित वसूली से जुड़ा वायरल वीडियो और उस पर हो रही पुलिस कार्रवाई। इसी बैठक में मौजूद एक व्यक्ति ने अचानक कहा—

“सब भाई साहब को फंसाने के लिए किया जा रहा है।”

बैठक में कोई कैमरा चालू नहीं था, कोई रिकॉर्डिंग नहीं थी। फिर भी भाजपा के दो प्रवक्ताओं ने पुष्टि की कि यह टिप्पणी उसी बैठक में की गई थी। बताया गया कि यह टिप्पणी करने वाला व्यक्ति भाजपा प्रवक्ता है, लेकिन पार्टी के भीतर “भाई साहब” शब्द का मतलब समझने के लिए किसी डिग्री की जरूरत नहीं होती। बैठक में मौजूद लोग भी तुरंत समझ गए थे कि इशारा किस ओर है।

अब जरा पुलिस जांच पर नजर डालते हैं। इस वायरल वीडियो को सामने आए दो महीने से ज्यादा वक्त बीत चुका है, लेकिन अब तक पुलिस केवल कुछ निचले स्तर के कर्मचारियों को ही गिरफ्तार कर पाई है। जांच आज भी इस बुनियादी सवाल पर अटकी है कि वीडियो किसी कंसल्टेंसी फर्म के कुछ युवकों की शरारत थी या फिर यह एक सुनियोजित साजिश थी—जिसका मकसद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को बदनाम करना था।

अगर यह साजिश थी, तो सवाल उठता है कि क्या कुछ छोटे कर्मचारी अपने दम पर इतने बड़े नेताओं के खिलाफ ऐसा कदम उठा सकते हैं?

इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने के लिए हमने भाजपा के पूर्व कोषाध्यक्ष और वर्तमान उपाध्यक्ष नंदन जैन से संपर्क करने की कोशिश की। पार्टी से जुड़े सूत्रों और पुलिस अफसरों का कहना है कि जिन चार युवकों को गिरफ्तार किया गया है, वे पहले मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का सोशल मीडिया पेज भी संभाल चुके हैं। भाजपा के कुछ नेताओं का दावा है कि इन युवकों का दफ्तर नंदन जैन के व्यावसायिक प्रतिष्ठान में भी संचालित होता था।

क्या इन युवकों का नंदन जैन से कोई सीधा संबंध था और अगर था, तो इस तरह के वीडियो में उनकी रुचि क्यों हो सकती थी। लेकिन नंदन जैन से संपर्क नहीं हो सका।

दिलचस्प यह भी है कि नंदन जैन को प्रदेश भाजपा संगठन महामंत्री पवन साय का करीबी माना जाता है और वे फिलहाल पार्टी की बजट प्रचार समिति का हिस्सा भी हैं। पार्टी के भीतर चल रही चर्चाओं में ज्यादातर नेता यह मानने को तैयार नहीं हैं कि मुख्यमंत्री, राष्ट्रीय अध्यक्ष और 1500 करोड़ रुपये का जिक्र करने वाला वीडियो किसी छोटी एजेंसी के कुछ युवकों की करतूत भर हो सकता है।

मामले से जुड़े भाजपा नेताओं के मुताबिक, इस एजेंसी से जुड़ा एक युवक बेमेतरा के एक वरिष्ठ भाजपा नेता का बेटा है। हैरानी की बात यह है कि न तो उसका नाम एफआईआर में दर्ज है और न ही किसी पुलिस शिकायत में। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि उसे बचाने के लिए प्रदेश के एक बड़े भाजपा नेता ने सीधे फोन किया था—वह भी तब, जब दिल्ली से पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इस वीडियो पर गहरी नाराजगी जताई थी।

बताया जाता है कि रायपुर के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने उस नेता को यह तक बता दिया था कि पार्टी हाईकमान इस पूरे मामले से बेहद नाराज है, इसके बावजूद भाजपा नेता के बेटे को अब तक कानूनी कार्रवाई से दूर रखा गया है।

अब फिर लौटते हैं उस टिप्पणी पर—

“भाई साहब को बदनाम करने की कोशिश हो रही है।”

राजनीतिक विश्लेषकों का सवाल है कि जब वीडियो सीधे तौर पर मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय अध्यक्ष के खिलाफ था, तो फिर ‘भाई साहब’ को बदनाम करने की बात क्यों कही गई? पार्टी के भीतर चर्चा है कि जिनकी ओर इशारा था, वे सत्ता में इतने प्रभावशाली हैं कि अफसरों को सीधे निर्देश देते रहे हैं। यहां तक कि एक वरिष्ठ अधिकारी ने उनके निर्देश मानने से इनकार करते हुए छुट्टी पर जाना ही बेहतर समझा।

तो सवाल साफ है—

क्या छत्तीसगढ़ की सत्ता के ऊपरी स्तरों पर कोई बड़ी साजिश चल रही है?

क्या पुलिस सच तक नहीं पहुंच पा रही है या फिर पार्टी की किरकिरी के डर से उसके हाथ बांध दिए गए हैं?

इन सवालों पर प्रतिक्रिया लेने के लिए हमने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह से संपर्क किया। उन्होंने फोन उठाया, लेकिन सवाल सुनते ही कॉल काट दी। वहीं रायपुर उत्तर से भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा ने सिर्फ इतना कहा—

“पुलिस की जांच चल रही है।”

गौरतलब है कि एफआईआर भी पुरंदर मिश्रा की शिकायत पर ही दर्ज हुई थी और उसी के आधार पर चार लोगों की गिरफ्तारी हुई।

अब बड़ा सवाल यह है कि रायपुर से लेकर दिल्ली तक हड़कंप मचाने वाले इस वीडियो की जांच आखिर कब पूरी होगी?

क्या पुलिस कभी प्रभावशाली लोगों तक पहुंचेगी, या फिर यह मामला उन कर्मचारियों की गिरफ्तारी तक ही सिमट जाएगा—जिन्हें बीते दो महीनों से उनकी ही एजेंसी ने वेतन तक नहीं दिया?

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