मध्यप्रदेश किसान संकट: आय में 23वां स्थान, कर्ज़ में डूबे किसान पर कमलनाथ का भाजपा पर हमला

Madhya Bharat Desk
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मध्यप्रदेश में बीते दो दशकों से जारी भाजपा शासन किसानों के लिए गंभीर संकट का कारण बनता जा रहा है। हालात यह हैं कि प्रदेश का किसान आज मासिक आमदनी के मामले में देश में 23वें स्थान पर पहुँच गया है। जहां एक ओर किसान की औसत आय बेहद कम हो गई है, वहीं दूसरी ओर उस पर कर्ज़ का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। इन हालातों के लिए पूर्व मुख्यमंत्री एवं विधायक कमलनाथ ने भाजपा सरकार को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया है।

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा है कि मध्यप्रदेश का किसान अभूतपूर्व आर्थिक दबाव में है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश के किसान की औसत मासिक आय महज़ 8,339 रुपये रह गई है, जो देश के कई राज्यों की तुलना में बेहद कम है। आय के इस स्तर पर मध्यप्रदेश देश में 23वें स्थान पर है, जबकि पड़ोसी राज्य गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ की स्थिति इससे कहीं बेहतर है।

कमलनाथ ने कहा कि किसानों की आमदनी जहां ठहरी हुई है, वहीं कर्ज़ का बोझ तेज़ी से बढ़ रहा है। प्रदेश में 92.49 लाख किसानों के खातों पर 1.69 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कृषि ऋण बकाया है। बीते पांच वर्षों में खेती और इससे जुड़ी गतिविधियों के लिए लिया गया कर्ज़ करीब 66 प्रतिशत बढ़ गया, लेकिन किसानों की आय उसी अनुपात में नहीं बढ़ सकी।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने कांग्रेस शासनकाल में शुरू की गई कर्ज़ माफ़ी योजना को बंद कर दिया, जिससे किसान गहरे कर्ज़ संकट में फँसते चले गए। कमलनाथ ने कहा, “मेरे मुख्यमंत्री कार्यकाल में कांग्रेस सरकार ने 27 लाख किसानों का कर्ज़ माफ़ किया था। अगर यह योजना जारी रहती, तो आज किसान इस तरह कर्ज़ में डूबा नहीं होता।”

पूर्व मुख्यमंत्री ने भाजपा पर चुनावी वादों से मुकरने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में गेहूं और धान पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ाने का जो वादा किया गया था, वह आज तक पूरा नहीं हुआ। प्रदेश का किसान आज भी अपनी अधिकांश फसलों के लिए घोषित MSP पाने के लिए संघर्ष कर रहा है।

कमलनाथ ने खाद और बीज की समस्या को भी गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में किसान को समय पर खाद और बीज नहीं मिलना आम बात हो गई है। ऊपर से नकली खाद और बीज किसानों की लागत बढ़ाकर उन्हें और अधिक नुकसान पहुँचा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार को खोखले वादों और प्रायोजित पुरस्कारों में उलझने के बजाय किसानों के लिए ठोस और ज़मीनी नीतियां बनानी चाहिए तथा पहले से किए गए वादों को पूरा करना चाहिए, ताकि प्रदेश का किसान आत्मनिर्भर बन सके।

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